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शेयर बाजार के उड़े परखच्चे, दुनिया के सबसे खराब परफॉमर्स में शामिल, ₹70 लाख करोड़ साफ

भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दुनिया के सबसे खराब परफॉर्मर में शामिल हो गया है। जून 2025 में भारतीय बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 5.33 लाख करोड़ डॉलर के पीक पर पहुंचा। वहां से घटकर यह 4.5 लाख करोड़ डॉलर तक आ चुका है। इस तरह एक साल से कम समय में बाजार से करीब ₹70 लाख करोड़ साफ हो गए हैं।

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भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती जा रही गिरावट

India Market Crash FY26 : भारतीय शेयर बाजार में FY26 के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली। पीक वैल्यूएशन से करीब ₹70 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगे कच्चे तेल और जियोपॉलिटिकल तनाव ने बाजार की चाल बिगाड़ दी, जिससे भारत ग्लोबल मार्केट्स से पिछड़ गया भारतीय बाजार की कुल वैल्यूएशन अपने पीक पर करीब 5.33 ट्रिलियन डॉलर थी, जो FY26 में घटकर 4.5 ट्रिलियन डॉलर पर आ गई। इस तरह कुल मिलाकर करीब 0.83 ट्रिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज हुई। रुपये में यह गिरावट करीब ₹68–70 लाख करोड़ बैठती है, जो निवेशकों के लिए बड़ा झटका है। यह हालिया वर्षों में सबसे बड़ी वैल्यू इरेजन में से एक माना जा रहा है।

3 साल की सबसे बड़ी गिरावट

सिर्फ FY26 की बात करें तो भारत का मार्केट कैप करीब 7–8% गिरा, जो FY23 के बाद सबसे बड़ी सालाना गिरावट है। ग्लोबल स्तर पर केवल 13 बाजारों में गिरावट दर्ज हुई, और भारत उन कमजोर बाजारों में नौवें स्थान पर रहा। यह संकेत देता है कि इस बार भारत ने उभरते और विकसित दोनों बाजारों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया।

दुनिया आगे, भारत पीछे

जहां भारतीय बाजार दबाव में रहा, वहीं कई बड़े ग्लोबल बाजारों ने शानदार रिटर्न दिए। दक्षिण कोरिया में 100% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली, जबकि ताइवान, कनाडा, चीन और जापान जैसे बाजारों ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की। अमेरिका और ब्रिटेन भी डबल डिजिट रिटर्न देने में सफल रहे। इस तुलना में भारत का प्रदर्शन स्पष्ट रूप से कमजोर रहा।

Stock Market Crash Valuation

सालभर में बड़ी गिरावट

गिरावट की बड़ी वजहें

भारतीय बाजार पर एक साथ कई दबाव बने रहे। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धार कमजोर की। ऊंचे वैल्यूएशन के कारण निवेशकों का भरोसा भी सीमित रहा, जबकि कंपनियों की कमाई में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी। इसके साथ ही ग्लोबल अनिश्चितता और ट्रेड से जुड़े तनावों ने जोखिम बढ़ाया।

क्रूड ऑयल ने बढ़ाया संकट

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरी हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, क्रूड में 20% की बढ़त से कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ पर करीब 1.5 प्रतिशत अंक का दबाव आता है। अगर तेल 100 डॉलर के आसपास रहता है, तो सालाना अर्निंग में करीब 3% तक की गिरावट संभव है। 120 डॉलर के स्तर पर यह असर 5% से ज्यादा तक पहुंच सकता है, जिससे आगे के अनुमान और कमजोर हो सकते हैं।

ब्रोकरेज ने घटाए ग्रोथ अनुमान

बढ़ते जोखिमों के बीच ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस अब अपने अनुमान घटा रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स ने CY26 और CY27 के ग्रोथ अनुमान में करीब 9 प्रतिशत अंक की कटौती की है। वहीं HSBC ने चेतावनी दी है कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव लंबा चलता है, तो FY27 की ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा। हालांकि, अनुमान है कि आने वाले महीनों में तेल की कीमतें कुछ नरम हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल बाजार पर दबाव बना रहेगा।

आगे क्या संकेत

भारतीय बाजार फिलहाल कई मोर्चों पर दबाव में है। हाई वैल्यूएशन, महंगा क्रूड और कमजोर ग्लोबल संकेत इसकी दिशा तय करेंगे। अगर विदेशी निवेश की वापसी होती है और तेल कीमतों में राहत मिलती है, तो रिकवरी संभव है। लेकिन फिलहाल आंकड़े साफ बताते हैं कि FY26 भारतीय शेयर बाजार के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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