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Dollar vs Rupee: Stock Market के साथ रुपया भी धड़ाम! 46 पैसे गिरकर ऑल-टाइम लो पर, जानें ताजा एक्सचेंज रेट

Dollar vs Rupee: सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 46 पैसे टूटकर 92.20 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर खुला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और वैश्विक तनाव ने रुपए पर भारी दबाव बना दिया है।

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Indian Rupee Hits Record Low (Photo: iStock)

Dollar vs Rupee: शेयर बाजार में गिरावट के साथ रुपया भी धड़ाम हो गया है। आज डॉलर के मुकाबले रुपया टूटकर ऑल टाइम लो 92.34 पर पहुंच गया। बता दें कि नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में सोमवार को भारतीय रुपया 0.50% या 46 पैसे गिरकर 92.1975 अमेरिकी डॉलर पर खुला। इसके बाद गिरावट और बढ़ गई। ईरान संकट बढ़ने और कच्चे तेल में उछाल से रुपया में बड़ी गिरावट आई है। बता दें कि कच्चा तेल पहली बार 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

रुपए की गिरावट का मुख्य कारण

रुपए की गिरावट का सबसे बड़ा कारण क्रूड ऑयल कीमतों का उछाल रहा है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और आपूर्ति बाधाओं ने तेल की कीमतों को 100 डॉलर से ऊपर पहुंचा दिया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसे इस तरह समझ सकते हैं कि जब तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपए की मांग कम होती है और मुद्रा गिरती है। भारत दुनिया में तेल का एक बड़ा आयातक देश है और कच्चे तेल की कीमतें सीधे तौर पर भारत के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा की जरूरत को प्रभावित करती हैं। भारत अपनी अधिकांश तेल की जरूरत विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि रुपए के लिए सीधे दबाव पैदा करती है।

भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है

इसके अलावा, तेल की बढ़ती कीमतों के चलते बाजार में आर्थिक अनिश्चितता भी देखी जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की ऊंची कीमतें पूरे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है। इसका असर रुपया पर और भी अधिक दबाव डाल सकता है, क्योंकि व्यापार घाटा बढ़ने से विदेशी मुद्रा की जरूरत भी बढ़ती है।

आम आदमी की जेब पर भी असर

रुपए की यह कमजोरी आम आदमी की जेब पर भी असर डाल सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल और अन्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि ये भी कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करते हैं। अगर तेल महंगा है तो तेल उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

आरबीआई के लिए बढ़ सकती है मुश्किल

मुद्रा को स्थिर करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भी कदम उठाता रहा है, लेकिन ऐसी स्थिति में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, RBI के लिए रुपए को पूरी तरह स्थिर रखना कठिन हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो रुपए पर दबाव और बढ़ सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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