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India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द, भारी टैरिफ से मिल सकती है राहत

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत अंतिम चरण में है। इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातों पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 15-16% तक किया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र इस समझौते के प्रमुख बिंदु बनकर सामने आए हैं।

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भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील जल्द होने की संभावना (तस्वीर-Facbook)

India-US Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) को लेकर चर्चाएं अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातों पर लगने वाले टैरिफ को मौजूदा 50% से घटाकर 15-16% तक लाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा और कृषि के क्षेत्र इस समझौते के अहम बिंदु बनकर उभरे हैं।

रूसी तेल पर निर्भरता घटाने को तैयार भारत?

वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरुरत का करीब 34% हिस्सा रूस से पूरा करता है, जबकि अमेरिका से यह आंकड़ा केवल 10% (मूल्य के अनुसार) है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बदले भारत रूसी तेल आयात में धीरे-धीरे कटौती करने पर सहमत हो सकता है। इस मुद्दे पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं होगी, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे अमेरिकी स्रोतों से अधिक तेल खरीदें।

बता दें कि रूसी तेल पर भारत की निर्भरता को लेकर अमेरिका पहले ही कड़ा रुख दिखा चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस से तेल आयात में कटौती के बिना व्यापार समझौता नहीं होगा। हालांकि, अमेरिका अब भी रूस जैसी छूट की पेशकश नहीं कर पाया है। वहीं, रूस द्वारा दी जाने वाली छूट भी पिछले एक साल में काफी कम हुई है। 2023 में $23 प्रति बैरल से घटकर अक्टूबर 2025 में केवल $2–2.5 प्रति बैरल रह गई है।

अमेरिकी मक्का और सोयामील को मिलेगी एंट्री?

अमेरिका ने भारत से गैर-जीएम (Genetically Modified) मक्का और सोयामील के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग की है। भारत हर साल 0.5 मिलियन टन अमेरिकी मक्का आयात करता है, और इस कोटे को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, हालांकि इस पर लगने वाली 15% आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। सोयामील को लेकर भी बातचीत चल रही है, लेकिन इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अमेरिकी टीम चाहती है कि यह उत्पाद मानव और पशु दोनों तरह की खपत के लिए भारत में प्रवेश कर सके। इस प्रस्ताव का घरेलू उद्योग विरोध कर रहा है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक सोयाबीन प्रोसेसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के डीएन पाठक ने कहा कि घरेलू किसान पहले से ही समर्थन मूल्य से कम दर पर बेचने को मजबूर हैं, ऐसे में अमेरिकी सोयामील को अनुमति देना उनके लिए और मुश्किलें बढ़ाएगा।

डेयरी उत्पादों पर निर्णय बाकी

अमेरिका ने उच्च गुणवत्ता वाले पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए भारत के बाजार तक पहुंच की मांग की है, लेकिन इस पर अभी कोई सहमति नहीं बनी है। भारत इस विषय को लेकर सतर्क है क्योंकि इससे देश के घरेलू डेयरी क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

समझौते में हो सकता है ‘रिव्यू मैकेनिज्म’

जानकारों के मुताबिक, समझौते में एक समीक्षा तंत्र (Review Mechanism) शामिल किए जाने पर सहमति बन रही है, जिससे समय-समय पर शुल्क और बाजार पहुंच की समीक्षा की जा सकेगी। यह व्यवस्था बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश के अनुसार लचीलापन प्रदान करेगी।

राजनीतिक मंजूरी का इंतजार

हालांकि समझौते की रूपरेखा करीब तय हो चुकी है, लेकिन कृषि और ऊर्जा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक मंजूरी अभी बाकी है। भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय इस पर काम कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस समझौते की औपचारिक घोषणा नवंबर 2025 में ASEAN शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की जा सकती है, बशर्ते दोनों नेता सम्मेलन में भाग लें।

विशेषज्ञों की राय

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि चीन के साथ बढ़ते तनाव और व्यापार युद्ध के चलते अमेरिका अब भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों की तलाश कर रहा है। भारत को इस समझौते में कृषि, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा जैसे मुद्दों पर अपनी शर्तों पर टिके रहना चाहिए, और किसी भी ऐसी शर्त से बचना चाहिए जो चीन से रणनीतिक स्वतंत्रता को प्रभावित करे। कुल मिलाकर यह प्रस्तावित व्यापार समझौता न केवल भारत के निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में भी एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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