United Nations: भारत ने वर्ष 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के नियमित बजट में 3.52 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान कर दिया है। इस भुगतान के साथ भारत उन 47 देशों में शामिल हो गया है, जो समय पर अपना पूरा बजट योगदान अदा करते हैं। संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय नियमों के अनुसार, सदस्य देशों को अपने नियमित बजट का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर करना होता है। भारत ने तीन फरवरी 2026 तक इस नियम का पालन किया और अपना पूरा योगदान जमा कर दिया।
समय पर भुगतान की अहमियत
संयुक्त राष्ट्र योगदान समिति के अनुसार, तीन फरवरी तक कुल 47 देशों ने निर्धारित 30 दिन की अवधि में अपना नियमित बजट अदा किया। इस सूची को ’ऑनर रोल’ कहा जाता है। इसमें शामिल होने वाले देश उन देशों की श्रेणी में आते हैं जो वित्तीय रूप से जिम्मेदार हैं और समय पर अपना योगदान देते हैं। भारत लगातार ऐसे देशों में शामिल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र का भारत पर ध्यान
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक दैनिक संवाददाता सम्मेलन में ’ऑनर रोल’ में शामिल देशों का जिक्र करते हुए भारत का नाम लिया। उन्होंने कहा, ’’यह वह देश है जहां दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, 182 मीटर ऊंची ’स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थित है। हां, बिल्कुल सही… भारत।’’ इस तरह भारत का नाम विशेष रूप से सराहना के साथ लिया गया।
भारत की लगातार प्रतिबद्धता
भारत की यह उपलब्धि केवल एक वित्तीय योगदान नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के प्रति उसकी लगातार प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। पिछले कई वर्षों से भारत समय पर और पूरा योगदान अदा करता रहा है। इस तरह के योगदान से संयुक्त राष्ट्र को अपने कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिलती है।
आगे की जिम्मेदारी और अंतरराष्ट्रीय योगदान
संयुक्त राष्ट्र का बजट दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से अनेक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम, शांति मिशन, मानवीय सहायता और विकास कार्य चलाए जाते हैं। भारत का समय पर योगदान न केवल उसकी वित्तीय जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी विश्वसनीयता को भी बढ़ाता है।
भारत की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। ’ऑनर रोल’ में नाम दर्ज होने से यह स्पष्ट होता है कि भारत संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में योगदान देने में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। समय पर भुगतान करने से भारत ने एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी और विश्वसनीयता को साबित किया है।
