India-Oman free trade agreement: भारत और ओमान ने गुरुवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए। इसके तहत वस्त्र, कृषि उत्पाद तथा चमड़े के सामान सहित भारत के 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान की जाएगी। दूसरी ओर भारत खजूर, संगमरमर और पेट्रो रसायन वस्तुओं जैसे ओमान के उत्पादों पर शुल्क कम करेगा। हालांकि, घरेलू किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिए कई संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए इन संवेदनशील उत्पादों को ‘छूट से बाहर की श्रेणी’ में रखा गया है। मंत्रालय के मुताबिक, शुल्क छूट से बाहर रखे गए उत्पादों में डेयरी एवं कृषि उत्पाद, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू उत्पाद, सोना-चांदी का बुलियन एवं आभूषण और जूते-चप्पल, खेल सामान और कई मूल धातुओं के स्क्रैप शामिल हैं।
अगले वर्ष की पहली तिमाही से लागू होने की उम्मीद
इस समझौता के अगले वर्ष की पहली तिमाही से लागू होने की उम्मीद है। यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब भारत को अपने सबसे बड़े निर्यात गंतव्य अमेरिका में 50 प्रतिशत तक के भारी शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।
इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग एवं निवेश संवर्धन मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने मस्कट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
संवेदनशील उत्पादों पर कोई रियायत नहीं
ओमान के लिए निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील उत्पादों के लिए, यह प्रस्ताव मुख्य रूप से खजूर, संगमरमर और पेट्रोरसायन उत्पादों जैसी वस्तुओं के लिए शुल्क-दर कोटा (टीआरक्यू) आधारित शुल्क उदारीकरण है। भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील उत्पादों को बिना किसी रियायत की पेशकश किए अलग श्रेणी में रखा है। विशेष रूप से कृषि उत्पाद, जिनमें दुग्ध, चाय, कॉफी, रबर एवं तंबाकू उत्पाद, सोना व चांदी की सिल्लियां, आभूषण, अन्य श्रम-प्रधान उत्पाद जैसे जूते, खेल के सामान और कई निम्न धातुओं का कबाड़ शामिल हैं।
मौजूदा समय में पांच प्रतिशत आयात शुल्क
ओमान में वर्तमान में श्रम प्रधान वस्तुओं पर लगभग पांच प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। सेवा क्षेत्र के मोर्चे पर ओमान कंप्यूटर संबंधी सेवाओं, व्यावसायिक एवं पेशेवर सेवाओं, ऑडियो-विजुअल सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं व्यक्त करेगा।
भातरीय कंपनियों के लिए मौके बढ़ेंगे
ओमान का वैश्विक सेवा आयात 12.52 अरब अमेरिकी डॉलर रहा जिसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 5.31 प्रतिशत थी। यह भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए अपार संभावनाओं को दर्शाता है। इसके अलावा, सीईपीए की एक प्रमुख विशेषता भारतीय पेशेवरों के लिए आवाजाही की बेहतर रूपरेखा है।
इस समझौते में ओमान के प्रमुख सेवा क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों द्वारा 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रावधान भी है। इसके तहत वाणिज्यिक उपस्थिति के माध्यम से भारत के सेवा उद्योग को इस क्षेत्र में अपने परिचालन का विस्तार करने के लिए व्यापक अवसर मिलेंगे।
इसके अतिरिक्त, दोनों पक्ष ओमान की अंशदायी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली लागू होने के बाद सामाजिक सुरक्षा समझौते पर भविष्य में चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं। यह श्रमिकों की आवाजाही एवं श्रमिक संरक्षण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को बताता है।
ओमान इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और यह भारतीय वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए व्यापक पश्चिम एशिया और अफ्रीका तक पहुंचने का एक प्रमुख प्रवेश द्वार है।
