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ईरान के लिए कुबेर के खजाने से कम नहीं Hormuz Strait, बन गई बात, तो हर साल होगी 10 लाख करोड़ की कमाई

अमेरिका के साथ अगर Hormuz Strait को लेकर ईरान की डील हो जाती है, तो यह संकरा समुद्री रास्ता ईरान के लिए कुबेर का खजाना साबित होगा, जहां से सालाना 10 लाख करोड़ रुपये तक की कमाई हो सकती है।

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होर्मुज में टोल वसूली का प्लान

US Iran War में अब परमाणु हथियार अदृश्य हो चुके हैं। अब जंग होर्मुज (Hormuz Strait) पर कंट्रोल की हो गई है। युद्ध के शुरुआती दौर में जहां ईरान ने अमेरिका और इसके सहयोगी देशों के होर्मुज से गुजरने पर रोक लगा दी थी। वहीं, अब अमेरिका ने ईरान के तटों की तरफ जा रहे या वहां से लौट रहे जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस तरह परमाणु हथियारों के नाम पर शुरू हुई यह जंग पूरी तरह ऑयल मार्केट को कंट्रोल करने की जंग बन गई है। पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच जो बातचीत हुई, उस दौरान ईरान ने होर्मुज में टोल वसूली को अपनी शर्तों में शामिल किया।

क्या चाहता है ईरान?

ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट उसकी राष्ट्रीय सीमा का हिस्सा है। इसके साथ ही ईरान का दावा है कि UNCLOS यानी यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना उसका अधिकार है।

क्या कहते हैं नियम?

होर्मुज स्ट्रेट का सबसे तंग हिस्सा सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39km) चौड़ा है। UNCLOS के मुताबिक तटीय देश अपने तटों से 12 नॉटिकल मील (करीब 22km) तक के समुद्र को अपना टेरिटोरियल वाटर बता सकते हैं। ऐसे में यह हिस्सा ओमान और ईरान के टेरिटोरियल वाटर का हिस्सा है।

क्या टोल वसूली जायज?

UNCLOS के नियमों के तहत तटीय देश अपने टेरिटोरियल वाटर में मरीन ट्रैफिक को रेगुलेट कर सकते हैं। हालांकि, UNCLOS के सेक्शन 38 के तहत दुनिया के 100 स्ट्रेट्स से इंटरनेशनल शिप्स को बिना किसी बाधा के गुजरने का अधिकार है। लेकिन, जिन देशों के टेरिटोरियल वाटर में ये स्ट्रेट्स मौजूद हैं, उन्हें युद्ध की स्थिति में या सेल्फ-डिफेंस के सिद्धांत के तहत अपनी जलीय सीमा से गुजरने वाले जहाजों की जांच और तलाशी लेने का अधिकार है। मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि ईरान अपने 12 नॉटिकल मील के हिस्से से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है।

क्या है ईरान की योजना?

ईरान ने ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में टोल वसूली की एक योजना बनाई है। हालांकि, ओमान ने इस योजना को सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन, ईरान की योजना के मुताबिक उसे होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले प्रत्येक बैरल क्रूड पर 1 डॉलर का टोल चाहिए। इसक बदले मे ईरान सेफ पैसेज की गारंटी देगा।

Hormuz toll Iran Plan

ईरान की टोल वसूली योजना

क्यों कामयाब नहीं हो पाई योजना?

ईरान की योजना के लिए ओमान की सहमति जरूरी है। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट के जितने हिस्से पर ईरान का हक है, उतना ही ओमान का भी है। ऐसे में अगर ओमान अपने हिस्से में कोई टोल नहीं लगाना चाहता है, तो ईरान का टोल लगाना पूरी तरह फिजूल हो जाएगा। हालांकि, युद्ध की स्थिति में ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमले की धमकी देकर ट्रैफिक को बाधित कर सकता है। लेकिन, यह लंबे समय तक संभव नहीं होगा।

तो ईरान को कितना फायदा?

JPMorgan Chase की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान अगर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लागू करता है, तो यह उसके लिए बेहद बड़ा राजस्व स्रोत बन सकता है। अनुमान के मुताबिक, प्रति जहाज करीब 20 लाख डॉलर शुल्क लेने और रोजाना 100–130 जहाजों के गुजरने पर सालाना कमाई 70 से 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यहां तक कि सीमित स्तर पर भी, खाड़ी में फंसे जहाजों से 4–6 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं। दूसरा मॉडल प्रति बैरल 1 डॉलर शुल्क का है, जिससे रोजाना करीब 2 करोड़ डॉलर और सालाना 7.3 अरब डॉलर की कमाई संभव है। कुछ आकलन बताते हैं कि अगर यह सिस्टम पूरी तरह लागू हुआ, तो ईरान की कुल कमाई 70–80 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जो उसके तेल निर्यात से होने वाली आय से भी ज्यादा हो सकती है। कुल मिलाकर, यह रणनीति होर्मुज जैसे अहम ऊर्जा मार्ग को ईरान के लिए एक बेहद बड़ा और स्थायी रेवेन्यू इंजन बना सकती है।

होर्मुज से सालाना कितने जहाज गुजरते हैं?

मरीन ट्रैफिक एनालिस्टों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से सामान्य तौर पर हर साल 30 से 40 हजार जहाज गुजरते हैं। वहीं, अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल फारस और ओमान की खाड़ी में 2000 के करीब जहाज फंसे हैं। इसके अलावा ईरान को भी इससे नुकसान हो रहा है। ऐसे में ईरान भी हल चाहता है।

क्या बिना होर्मुज हो पाएगी डील?

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका के साथ बातचीत में एक प्रेशर पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया है। ईरान की सबसे बड़ी शर्तों में होर्मुज पर टोल वसूली नहीं है। बल्कि, अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते अटकी 100 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम, सुरक्षा की गारंटी और इंटरनेशनल ट्रेड में ईरान की वापसी सबसे बड़ी शर्तें हैं। अगर ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों के बिना करोबार कर पाएगा, तो इससे भी ईरान की इकोनॉमी को बड़ा बूस्ट मिलेगा, इस स्थिति में ईरान होर्मुज पर टोल वसूली की योजना पर समझौता करने को तैयार हो जाएगा।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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