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हीटवेव से सीधे कमाई पर असर: दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, मछुआरे और छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा मार

Heatwave Impact: भीषण हीटवेव से दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, मछुआरे और छोटे कारोबारियों की कमाई घट रही है। गर्मी के कारण काम और ग्राहकों की संख्या दोनों कम हो गए हैं।

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हीटवेव का रोजगार पर असर (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Heatwave Impact : देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव (Heatwave) अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों की रोजी-रोटी पर भी सीधा असर डाल रही है। तेज धूप और लू के कारण बाहर काम करने वाले लोगों की आमदनी लगातार घट रही है। दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, मछुआरे और छोटे कारोबारी इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई जगह दोपहर के समय काम करीब ठप हो जाता है, जिससे उनकी कमाई पर बड़ा असर पड़ रहा है।

दिहाड़ी मजदूरों की कमाई में गिरावट

निर्माण स्थलों, सड़कों और खुले में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों के लिए हीटवेव सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। तेज धूप में काम करना मुश्किल होने के कारण काम के घंटे घटा दिए जाते हैं या काम रोकना पड़ता है। कई मजदूर सुबह जल्दी काम शुरू करते हैं और दोपहर में ब्रेक लेते हैं, लेकिन इससे उनकी कुल मजदूरी कम हो जाती है। कुछ जगहों पर ठेकेदार भी काम की गति धीमी कर देते हैं, जिससे मजदूरों को पूरे दिन का काम नहीं मिल पाता।

रेहड़ी-पटरी वालों का धंधा प्रभावित

सड़क किनारे ठेले और रेहड़ी लगाने वाले छोटे व्यापारियों की बिक्री भी गर्मी में कम हो जाती है। दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर लोगों की आवाजाही घट जाती है। तेज धूप और गर्म हवा के कारण ग्राहक कम निकलते हैं, जिससे सब्जी, फल, पानी, जूस और अन्य सामान बेचने वालों की आमदनी घट जाती है। कई विक्रेता शाम के समय ही अपना कारोबार शुरू करते हैं, जिससे उनकी कुल बिक्री प्रभावित होती है।

किसानों पर दोहरी मार

किसानों के लिए हीटवेव खेती और आमदनी दोनों पर असर डाल रही है। एक तरफ फसलें तेज गर्मी और पानी की कमी से खराब हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ खेतों में काम करना भी मुश्किल हो गया है। सिंचाई की जरुरत बढ़ जाती है, जिससे खर्च भी बढ़ता है। कुछ फसलों की गुणवत्ता पर असर पड़ने से बाजार में सही कीमत नहीं मिल पाती। इससे किसानों की कुल कमाई घट जाती है और आर्थिक दबाव बढ़ता है।

मछुआरों की आजीविका पर असर

गर्मी और बढ़ते तापमान का असर नदियों, तालाबों और समुद्री क्षेत्रों में भी दिख रहा है। पानी का तापमान बढ़ने से मछलियों की उपलब्धता और उनकी गतिविधि प्रभावित होती है। कई जगह मछुआरों को पर्याप्त मछलियां नहीं मिल पातीं, जिससे उनकी आमदनी घट जाती है। इसके अलावा तेज गर्मी में लंबे समय तक पानी में रहना भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो जाता है।

छोटे कारोबारियों की चुनौतियां

छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों की बिक्री भी हीटवेव के कारण प्रभावित हो रही है। बाजारों में ग्राहकों की भीड़ कम हो जाती है और लोग जरूरी सामान ही खरीदने बाहर निकलते हैं। गर्मी के कारण कई लोग घरों से कम निकलते हैं, जिससे छोटे व्यवसायों की बिक्री घट जाती है। बिजली की खपत बढ़ने से खर्च भी बढ़ता है, जिससे मुनाफा और कम हो जाता है।

हीटवेव अब केवल मौसम की चुनौती नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्थिक संकट का कारण भी बन रही है। सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो रोज कमाकर अपना जीवन चलाते हैं। ऐसे में जरूरत है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत उपायों, पानी की व्यवस्था, काम के सुरक्षित समय और आर्थिक सहायता पर ध्यान दें, ताकि कमजोर वर्ग पर गर्मी का असर कम किया जा सके।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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