देश के कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी के कारण लू लगने यानी हीट स्ट्रोक के मामलों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अगर किसी व्यक्ति को लू लगने से अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो क्या हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत क्लेम मिल सकता है या नहीं।
कई हेल्थ पॉलिसियों में मिल सकता है कवरेज
नियमों के मुताबिक अधिकतर सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में हीट स्ट्रोक या लू से जुड़ी बीमारी का इलाज कवर किया जाता है। यदि मरीज को तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, बेहोशी या अन्य गंभीर स्थिति के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो अस्पताल का खर्च इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दिया जा सकता है, हालांकि यह पूरी तरह पॉलिसी की शर्तों और कवरेज पर निर्भर करता है।
अस्पताल में भर्ती होना जरूरी
आमतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम तभी स्वीकार किया जाता है जब मरीज को डॉक्टर की सलाह पर अस्पताल में भर्ती कराया गया हो। केवल ओपीडी इलाज या सामान्य दवाइयों के खर्च पर हर पॉलिसी में क्लेम नहीं मिलता। कई कंपनियां 24 घंटे से ज्यादा अस्पताल में भर्ती रहने की शर्त भी रखती हैं।
पॉलिसी की शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी
इंश्योरेंस कंपनियां अलग-अलग नियमों के आधार पर क्लेम मंजूर करती हैं। कुछ पॉलिसियों में प्राकृतिक आपदा या मौसम से जुड़ी बीमारियों को शामिल किया जाता है, जबकि कुछ योजनाओं में सीमित कवरेज होता है। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय उसके नियम, एक्सक्लूजन और कवरेज को ध्यान से पढ़ना जरूरी माना जाता है।
कैशलेस और रीइम्बर्समेंट दोनों विकल्प
यदि इलाज नेटवर्क अस्पताल में कराया जाता है, तो मरीज कैशलेस सुविधा का लाभ उठा सकता है। वहीं, गैर-नेटवर्क अस्पताल में इलाज कराने पर बिल जमा कर रीइम्बर्समेंट क्लेम लिया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर की सलाह, डिस्चार्ज समरी और अस्पताल के बिल जैसे दस्तावेज जरूरी होते हैं।
गर्मी में सावधानी बरतने की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप में लंबे समय तक रहने, पानी की कमी और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और दोपहर के समय धूप से बचना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सावधानी बरतकर हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।
