भारत इस समय अभूतपूर्व और विनाशकारी भीषण गर्मी के संकट से जूझ रहा है। 20 मई दोपहर लगभग 2:30 बजे AQI.in की लाइव तापमान रैंकिंग के अनुसार, दुनिया के सभी 100 सबसे गर्म शहरी क्षेत्र पूरी तरह से भारत में ही केंद्रित थे। तापमान में इस अत्यधिक बढ़ोतरी ने इस मौसम के जलवायु परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है, देश भर के कई शहरों में तापमान 45-46 डिग्री पहुंच गया है। खास तौर पर यूपी के बांदा ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसने सभी को हिलाकर रख दिया। बांदा में तापमान ने 48°C के पार पहुंचकर गर्मी का हर रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
देशव्यापी हीटवेव का दौर
यह भीषण लू अब सिर्फ पारंपरिक रूप से शुष्क इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने उत्तरी, मध्य और पूर्वी भारत को शुष्क, दम घोंटने वाली हवा की व्यापक चपेट में ले लिया है। हालात इस कदर गंभीर हो गए हैं कि दिल्ली सहित अलग-अलग स्थानों पर तापमान 46°C की सीमा को पार कर गया। इसने नागरिक बुनियादी ढांचे और मानवीय सहनशक्ति की परीक्षा ले ली। कई अन्य प्रमुख शहरी और क्षेत्रीय केंद्र भी इससे अछूते नहीं हैं और कई शहर 46°C से 47°C के भीषण तापमान की चपेट में हैं।
इस घनी आबादी वाले शहरों में चंडीगढ़, जम्मू, बठिंडा, पठानकोट, बरेली, झांसी और हरिद्वार जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं जहां तापमान 45 डिग्री के उपर चल रहा है। अब तो सहनीय माने जाने वाले मानक भी नाटकीय रूप से बदल गए हैं। नई दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख महानगर वैश्विक शीर्ष 100 सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं, फिर भी वहां भीषण गर्मी 44°C से 45°C तक दर्ज की गई। यूपी के बांदा ने हर रिकॉर्ड तोड़ दिया है और यहां तापमान 48 डिग्री पहुंच गया है। इसे देख विशेषज्ञ भी हैरान हैं कि एक छोटा सा जिला इतनी प्रचंड गर्मी की मार कैसे झेल रहा है। भौगोलिक रूप से रैंकिंग का फैलाव इस बात को दर्शाता है कि संकट कितना व्यापक हो गया है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और झारखंड में झुलसे हुए इलाके शामिल हैं।
20 मई 2026 को जिन शहरों/इलाकों में तापमान 46°C से ऊपर दर्ज किया गया-
| शहर | तापमान |
| बांदा (उत्तर प्रदेश) | 48.2°C |
| वर्धा (महाराष्ट्र) | 47.1°C |
| रोहतक (हरियाणा) | 46.9°C |
| चुरू (राजस्थान) | 46.6°C |
| बठिंडा (पंजाब) | 46.6°C |
| दिल्ली रिज क्षेत्र | 46.5°C |
| मुंगेशपुर (दिल्ली) | 46.3°C |
| नागपुर सोनेगांव | 46.2°C |
आईएमडी ने जारी की गंभीर चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने तत्काल सलाह जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में भीषण लू की स्थिति बनी रहने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, लगातार बादल न छाए रहने और लगातार शुष्क सौर विकिरण के कारण उत्तरी मैदानी इलाकों और मध्य भारत के बड़े हिस्से अत्यधिक गर्मी की चपेट में रहेंगे। मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं का अनुमान है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ये भीषण स्थितियां 24 मई तक जारी रहेंगी, जिससे निवासियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी।
दक्षिण में मौसम राहत भरा, बारिश का आगमन जल्द
हैरत की बात यह है कि जहां उत्तरी और मध्य मैदानी इलाके भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं, वहीं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों के लिए भीषण आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यह स्पष्ट विरोधाभास देश की जलवायु संबंधी गहरी असमानता को उजागर करता है, जहां देश का एक हिस्सा संभावित बाढ़ से जूझ रहा है, वहीं दूसरा हिस्सा भीषण गर्मी का सामना कर रहा है।
देश के दक्षिणी राज्यों और द्वीपों में स्थिति बिल्कुल अलग है। केरल में कई जगहों पर बारिश हुई; अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में भारी बारिश हुई, और तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों और पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के कुछ इलाकों में छिटपुट पानी बरसा। ओडिशा के कोरापुट में न्यूनतम तापमान 19.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
लू से बचने की अपील
स्वास्थ्य अधिकारी लू लगने के जोखिम और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या पर नजर रख रहे हैं, इसलिए नागरिकों से दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने का आग्रह किया गया है। गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, चौड़ी किनारी वाली छतरियों का उपयोग करना, ढीले सुरक्षात्मक कपड़े पहनना और बच्चों, श्रमिकों और बुजुर्गों का ध्यान रखना शामिल है।
लू से लेकर भीषण लू तक का अलर्ट
21 मई कोलू से लेकर भीषण लू तक की स्थिति बने रहने की प्रबल संभावना है। आईएमडी के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ में भीषण गर्मी जारी रहेगी। बिहार, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तराखंड भी लू की चपेट में हैं। उत्तर पश्चिम भारत और मध्य भारत में अगले लगभग सात दिनों तक लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हिमालय में आज और कल भी ऐसी स्थिति रह सकती है, लेकिन मैदानी इलाकों में इसका प्रकोप जारी रहने की आशंका है।
सुपर अल नीनो का असर
दरअसल, इस भीषण गर्मी की वजह सुपर अल नीनो है। वैज्ञानिकों की मानें तो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली 'सुपर अल नीनो' आकार ले रहा है, जो 1877 के बाद की सबसे विनाशकारी मौसम संबंधी घटना साबित हो सकता है। इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि अल नीनो भारत की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून को भी प्रभावित करने वाला है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जो तब सक्रिय होता है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस बार जुलाई तक इसके पूरी तरह सक्रिय होने की 82% संभावना है। जब यह तापमान 2 डिग्री से अधिक बढ़ जाता है, तो उसे 'सुपर अल नीनो' कहते हैं। अल नीनो के कारण हवाओं का पैटर्न बदल जाता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसका सीधा असर अगस्त और सितंबर के महीनों में देखने को मिलेगा, जब बारिश में भारी कमी आ सकती है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल देश में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका 35% है, जो सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। इतिहास गवाह है कि 2015 और 2023 के भयंकर सूखे के पीछे भी यही अल नीनो जिम्मेदार था।