Indian Economy: इकोनॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट एनसीएईआर (NCAER) ने कहा है कि बेहतर वैश्विक आउटलुट और सामान्य से अच्छे मानसून की संभावना के चलते चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत से अधिक बढ़ सकती है। 'नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च' (एनसीएईआर) ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा (एमईआर) के अप्रैल 2024 अंक में कहा कि जीएसटी कलेक्शन, पीएमआई, बिजली खपत, माल ढलाई जैसे हाई फ्रीक्वेंसी वाले संकेतक घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। इसमें मैन्युफैक्चरिंग के लिए पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) 16 साल के उच्च स्तर पर है और डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI के जरिए लेनदेन भी उच्चतम स्तर पर है।
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इकोनॉमी के लिए बेहतर संकेत
एनसीएईआर की डायरेक्टर जनरल पूनम गुप्ता ने कहा है कि ग्लोबल ग्रोथ और ट्रेड वॉल्यूम दोनों में अनुमानित तेजी के साथ ही सामान्य से अच्छे मानसून के पूर्वानुमान से यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर सकती है।
गुप्ता ने कहा है कि इन हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के साथ ही आईएमएफ और डब्ल्यूटीओ के अनुसार बेहतर ग्लोबल आउटलुक के चलते चालू वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत हैं।
कितना पहुंचा जीएसटी कलेक्शन
एनसीएईआर के अनुसार, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन मार्च में 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2017 में इसके लागू होने के बाद से दूसरा सबसे अधिक कलेक्शन है। यूपीआई ने मार्च 2024 में 13.4 अरब लेनदेन (वॉल्यूम में) दर्ज किए, जो इसके लागू होने के बाद से सबसे अधिक है।
