रिलेशनशिप थेरेपिस्ट्स के अनुसार, यह डर पूरी तरह से सामान्य है, लेकिन सही मानसिक दृष्टिकोण अपनाकर आप अपने विचार और पसंद से मेल खाने वाले दोस्तों को ढूंढ सकते हैं। इसके लिए थेरेपिस्ट्स 5 उपाय बताते हैं:
अपने पसंदीदा शौक, क्लास या कम्युनिटी ग्रुप्स का हिस्सा बनें। जब आप अपनी रुचि वाली गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो समान सोच वाले लोगों से मिलना आसान हो जाता है।
नए लोगों से मिलते समय यह सोचने के बजाय कि क्या वे मुझे पसंद करेंगे? यह सोचें कि क्या मुझे उनके साथ वक्त बिताना अच्छा लग रहा है?
दोस्ती की शुरुआत एक दिन में नहीं होती। हल्की बातचीत, एक मुस्कान या किसी तारीफ से कनेक्शन बनाना शुरू करें।
यह समझें कि रिजेक्शन का डर सिर्फ आपको नहीं, बल्कि सामने वाले इंसान को भी हो सकता है। अपनी झिझक को स्वीकार करने से बातचीत में सहजता आती है।
एक बार मिलने के बाद संपर्क खत्म न होने दें। मैसेज करना, हाल-चाल पूछना और साथ में वक्त बिताने की योजना बनाना रिश्ते को मजबूत करता है।
सच्ची दोस्ती बनने में समय और धैर्य लगता है। खुद को खुलकर अभिव्यक्त करें और रिजेक्शन के डर को अपने ऊपर हावी न होने दें। जब आप सही प्रयास करेंगे, तो सही लोग खुद-ब-खुद आपकी जिंदगी का हिस्सा बन जाएंगे।