अगर किसी व्यक्ति के खाने में कुछ जरूरी विटामिन या मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रहे हैं, तो मल्टीविटामिन उनकी कमी पूरी करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि कैप्सूल रोज के संतुलित खाने की जगह ले सकता है।
कुछ पोषक तत्वों की कमी होने पर थकान, कमजोरी या सुस्ती महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह से लिया गया सही सप्लीमेंट मददगार हो सकता है। लेकिन हर बार थकान का कारण विटामिन की कमी ही हो, यह जरूरी नहीं है।
जिन लोगों की डाइट बहुत सीमित है, खाने से पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है या डॉक्टर ने किसी खास पोषक तत्व की कमी बताई है, उन्हें मल्टीविटामिन की जरूरत पड़ सकती है। उम्र, खान-पान और शरीर की जरूरत के हिसाब से सलाह अलग हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्वों की जरूरत बदल जाती है। इस समय कोई भी सामान्य मल्टीविटामिन कैप्सूल अपनी मर्जी से लेना सही नहीं है। गर्भावस्था में कौन-सा सप्लीमेंट और कितनी मात्रा में लेना है, यह डॉक्टर तय करते हैं।
यह सोचना गलत है कि विटामिन ज्यादा लेने से शरीर को ज्यादा फायदा होगा। कुछ विटामिन शरीर में जमा हो सकते हैं और जरूरत से ज्यादा मात्रा परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए एक साथ कई सप्लीमेंट लेने से पहले उनकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
कुछ लोगों को मल्टीविटामिन लेने के बाद मितली, पेट में भारीपन, कब्ज या दूसरी पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। खाली पेट लेने पर परेशानी बढ़ भी सकती है। इसलिए पैक पर दिए निर्देशों और डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर आपकी डाइट संतुलित है और शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी नहीं है, तो सिर्फ ट्रेंड देखकर मल्टीविटामिन शुरू करने की जरूरत नहीं होती। बेहतर तरीका यही है कि पहले अपनी डाइट और जरूरत को समझें और कमी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।