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Trump का एक फैसला और IT Stocks में निवेशकों के डूबे ₹55,000 करोड़, जानें क्यों मचा हड़कंप?

अमेरिका ने वीजा धोखाधड़ी के मामलों में चेन्नई स्थि​त आईटी कंपनी ’कॉग्निजेंट’ द्वारा विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड के लिए किए जाने वाले स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों (PERM) पर रोक लगा दी है। इसका असर आईटी स्टॉक्स पर हुआ है।

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आईटी स्टॉक्स में बड़ी गिरावट क्यों?

भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का दबाब है। पिछले 5 दिनों में सेंसेक्स 1,798 अंक टूटकर 75,000 के करीब पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 टूटकर 23,600 के नीचे फिसल गया है। सबसे बुरा हाल आईटी शेयरों का है। NIFTY IT में 3% से अधिक की गिरावट है। इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो से लेकर तमाम आईटी स्टॉक्स में जबरदस्त बिकवाली है। आईटी शेयरों में जबरदस्त गिरावट से आज के दिन ही निवेशकों के करीब ₹55,000 करोड़ डूब गए हैं। आखिर, आईटी शेयरों में इतनी तगड़ी गिरावट की वजह क्या है? आइए जानते हैं।

कंपनीताजा भाव (₹)आज कितना टूटा (₹)बदलाव (%)
Infosys (INFY)1,038.50-43.50-4.02%
TCS2,197.50-58.00-2.57%
HCL Technologies1,238.80-38.20-2.99%
Tech Mahindra1,515.50-43.50-2.79%
Coforge1,869.90-80.10-4.11%
Persistent Systems5,445.50-114.50-2.06%
Wipro167.95-3.55-2.07%

ट्रंप के इस फैसले से आईटी शेयरों में कोहराम

आज आईटी शेयरों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वीजा रोकने का फैसला है। अमेरिका ने कथित वीजा धोखाधड़ी के मामलों में चेन्नई स्थित आईटी कंपनी ’कॉग्निजेंट’ द्वारा विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड के लिए किए जाने वाले स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों (पीईआरएम) पर रोक लगा दी है। यह प्रक्रिया अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में उठाया जाने वाला शुरुआती कदम माना जाता है।

अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पसीटो ने मंगलवार को घोषणा की कि उन्होंने चेन्नई में स्थापित 'कॉग्निजेंट' और ’क्लाउडेरा’ के स्थायी श्रम प्रमाणन संबंधी आवेदनों पर रोक लगा दी है। डी’एस्पोसिटो ने कहा, कि अमेरिकी कामगारों के लिए खतरे को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों कंपनियों के खिलाफ जांच व्हाइट हाउस धोखाधड़ी कार्य बल और अन्य अधिकारियों के साथ समन्वय में की गई।

ग्रीन कार्ड लेना हुआ मुश्किल

'पीईआरएम’ एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने और उनके ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले अमेरिकी श्रम विभाग से मंजूरी लेती हैं। इस प्रक्रिया के तहत नियोक्ताओं को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कामगार मौजूद नहीं है तथा किसी विदेशी कामगार को नियुक्त करने से अमेरिकी कामगारों के वेतन या काम करने की परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

जुलाई में ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और पीईआरएम रोजगार वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी को लेकर बड़े पैमाने पर जांच शुरू की थी।

'कॉग्निजेंट’ की स्थापना 1994 में चेन्नई में हुई थी और अब इसका मुख्यालय न्यू जर्सी के टीनेक में है।

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून तक कॉग्निजेंट के लिए ए-1बी वीजा की 3,510 याचिकाओं को मंजूरी मिली थी, जबकि 2020 में यह संख्या 9,413 थी।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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