देश में कच्चे तेल के आयात को कम करने और हरित ईंधन (Green Fuel) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (Ethanol Blending Program) अब तेज़ी से रंग ला रहा है। हाल ही में संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की बिक्री और खपत के मामले में देश का सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। यूपी में अकेले रिकॉर्ड 125 करोड़ लीटर से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) की बिक्री दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि राज्य में वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन का दायरा कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है।
सरकार ने बताए आंकड़े
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संसद में साझा की गई जानकारी के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल की बिक्री के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र रहा है। महाराष्ट्र में भी बड़े पैमाने पर एथेनॉल युक्त पेट्रोल की खपत दर्ज की गई है, जबकि दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों जैसे कर्नाटक और तमिलनाडु ने भी इस सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। गन्ने और कृषि अवशेषों के विशाल उत्पादन के कारण उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र दोनों ही राज्यों को एथेनॉल के स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति में सीधा लाभ मिल रहा है, जिससे यहाँ ईंधनों में सम्मिश्रण का दायरा तेज़ी से बढ़ पाया है।
सबसे कम यहां बिका एथेनॉल वाला पेट्रोल
दूसरी तरफ, यदि सबसे कम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री वाले क्षेत्रों की बात करें, तो पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में इसकी खपत सबसे कम दर्ज की गई है। लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर के दूरदराज के इलाकों में भौगोलिक सीमाओं, परिवहन की चुनौतियों और एथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की कमी के कारण एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री नगण्य या बेहद कम रही है। सरकार इन इलाकों में भी लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाकर आपूर्ति पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है।
भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य तय किया है, जिसे निर्धारित समयसीमा से पहले हासिल करने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है। संसद में पेश आंकड़े यह साफ करते हैं कि एथेनॉल सम्मिश्रण से न केवल विदेशी मुद्रा की भारी बचत हो रही है और कच्चे तेल पर निर्भरता घट रही है, बल्कि इससे देश के किसानों की आय में भी सीधा इजाफा हो रहा है। गन्ने और अनाज से उत्पादित होने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ने से चीनी मिलों और एथेनॉल डिस्टिलरीज को बढ़ावा मिल रहा है, जिसका सीधा आर्थिक फायदा कृषि क्षेत्र को पहुँच रहा है।
