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सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी एक फिक्स पेंशन ! NPS में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में मोदी सरकार

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jun 21, 2023, 05:58 PM IST

Government May Fixed Assured Return In NPS:न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, केंद्र सरकार जिस नए फॉर्मूले को तैयार कर रही है, उसके तहत कर्मचारियों को 40-50 फीसदी राशि वाली फिक्स पेंशन का ऑफर मिल सकता है। इसके तहत सरकारी कर्मचारी ने रिटायरमेंट से पहले जो आखिरी सैलरी ली है, उसके आधार पर 40-50 फीसदी रकम पेंशन के रुप में बनेगी।

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NPS में होगा बड़ा बदलाव

Government May Fixed Assured Return In NPS: मोदी सरकार 2024 के आम चुनाव से पहले, सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके तहत सरकार NPS के नियमो में बदलाव कर सकती है। जिसमें सरकारी कर्मचारियों को एक फिक्स पेंशन की गारंटी मिल जाएगी। अगर ऐसा होता है तो साल 2004 में पेंशन सिस्टम को खत्म करने के बाद यह बड़ा बदलाव होगा। खास तौर से यह फैसला इस मायने में भी बेहद अहम साबित हो सकता है, जब कई राज्यों में भाजपा विरोधी दलों की सरकारों ने ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू कर दिया है। अभी NPS में कांट्रिब्यूशन के आधार पर कर्मचारी की पेंशन बनती है। जबकि ओल्ड पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय कर्मचारी द्वारा ली गई आखिरी सैलरी के आधार पर 50 फीसदी राशि पेंशन के रुप में तय होती है।

नई व्यवस्था में भी आखिरी सैलरी बनेगी आधार

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, केंद्र सरकार जिस नए फॉर्मूले को तैयार कर रही है, उसके तहत कर्मचारियों को 40-50 फीसदी राशि वाली फिक्स पेंशन का ऑफर मिल सकता है। इसके तहत सरकारी कर्मचारी ने रिटायरमेंट से पहले जो आखिरी सैलरी ली है, उसके आधार पर 40-50 फीसदी रकम पेंशन के रुप में बनेगी। न्यू पेंशन स्कीम में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी की 10 फीसदी और सरकार उसकी बेसिक सैलरी का 14 फीसदी राशि पेंशन फंड कांट्रिब्यूट करती है। जिसके आधार पर जमा रकम पेंशन का आधार बनती है।

अगर नया प्रस्ताव लागू हो जाता है तो सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल सकता है। रॉयटर्स के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है अभी न्यू पेंशन स्कीम के तहत आमतौर सरकारी कर्मचारियों को उनकी आखिरी सैलरी की तुलना में औसतन 38 फीसदी राशि के बराबर पेंशन बनती है। अगर सरकार इसे 40 फीसदी करती है तो कर्मचारियों को 2 फीसदी का फायदा मिलेगा लेकिन अगर यह रकम 50 फीसदी तक पहुंचती है तो उनकी बल्ले-बल्ले हो जाएगी।

विपक्षी दलों के शासित राज्यों ने लागू कर दी ओल्ड पेंशन स्कीम

ओल्ड पेंशन स्कीम राज्य विधान सभा चुनावों में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनती जा रही है। इसके तहत विपक्षी दलों ने भाजपा को निशाने पर लिया है और हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में कांग्रेस की जीत में ओल्ड पेंशन का बड़ा योगदान रहा है। कांग्रेस की सरकारों ने छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू कर दिया है। जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर दी है। विपक्षी दलों के रुख और लोगों की मांग को देखते हुए सरकार ने NPS में सुधार के लिए कमेटी के गठन का ऐलान किया था।

अगर सरकार नया सिस्टम लागू करती है तो भी ओल्ड और न्यू पेंशन स्कीम में एक बड़ा अंतर बरकरार रहेगा। ओल्ड पेंशन में कर्मचारियों को अपने तरफ से कोई कांट्रिब्यूशन नहीं करना पड़ता है। जबकि न्यू पेंशन व्यवस्था में कर्मचारी को भी कांट्रिब्यूशन करना पड़ता है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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