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Gold Import: सोने के आयात पर सरकार की बड़ी सख्ती, कितना ला सकते हैं ड्यूटी फ्री सोना, तय कर दी सीमा

Gold Import : सरकार ने सोने के बढ़ते आयात पर सख्ती करते हुए शुल्क 15 प्रतिशत किया और अग्रिम मंजूरी योजना में 100 किलो की सीमा तय कर निगरानी नियम भी कड़े कर दिए।

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सरकार ने सोने के आयात पर लगाया बड़ा ब्रेक (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Gold Import : देश में बढ़ते सोने के आयात और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कीमती धातुओं पर आयात शुल्क (Gold import duty) बढ़ाने के एक दिन बाद सरकार ने अब अग्रिम मंजूरी योजना (एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम) के तहत सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की सीमा तय कर दी है। पहले इस योजना के तहत सोने के आयात की कोई सीमा नहीं थी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को कम करना और देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा पर नियंत्रण करना है।

क्या है अग्रिम मंजूरी योजना

अग्रिम मंजूरी योजना के तहत आभूषण निर्यातकों को बिना किसी आयात शुल्क के सोना और अन्य कच्चा माल आयात करने की अनुमति दी जाती है। इस योजना का फायदा उन कंपनियों को मिलता है जो आयात किए गए सोने का इस्तेमाल करके आभूषण बनाती हैं और फिर उन्हें विदेशों में निर्यात करती हैं। इस योजना में केवल कच्चा माल ही नहीं बल्कि पैकेजिंग सामग्री, ईंधन, तेल और कैटेलिस्ट जैसी चीजों को भी शुल्क-मुक्त आयात करने की सुविधा दी जाती है, अगर उनका उपयोग निर्यात किए जाने वाले उत्पाद को तैयार करने में किया जाता हो।

अब 100 किलो से ज्यादा सोना आयात नहीं कर सकेंगे

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा है कि अब अग्रिम मंजूरी योजना के तहत अधिकतम 100 किलोग्राम सोने के आयात की ही अनुमति दी जाएगी। यानी कोई भी निर्यातक इस सीमा से ज्यादा सोना शुल्क-मुक्त तरीके से आयात नहीं कर सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे सोने के अनियंत्रित आयात पर रोक लगेगी और योजना का दुरुपयोग भी कम होगा।

पहली बार आवेदन करने वालों की होगी जांच

सरकार ने इस योजना के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब अगर कोई कंपनी या व्यक्ति पहली बार अग्रिम मंजूरी के लिए आवेदन करेगा तो उसकी उत्पादन इकाई का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य होगा। इस निरीक्षण में यह देखा जाएगा कि फैक्ट्री वास्तव में मौजूद है या नहीं, उसकी उत्पादन क्षमता कितनी है और वह चालू हालत में है या नहीं। इससे फर्जी कंपनियों और गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वालों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

अगली मंजूरी के लिए पूरी करनी होगी शर्त

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी निर्यातक को अगली अग्रिम मंजूरी तभी मिलेगी जब वह पहले जारी की गई मंजूरी के तहत तय निर्यात लक्ष्य का कम से कम 50 प्रतिशत पूरा कर लेगा। सरकार का कहना है कि इससे केवल गंभीर और सक्रिय निर्यातकों को ही इस योजना का फायदा मिलेगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि आयात किया गया सोना वास्तव में निर्यात के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

सरकार ने निगरानी प्रक्रिया को भी मजबूत कर दिया है। अब अग्रिम मंजूरी धारकों को हर पखवाड़े यानी 15 दिन में अपनी प्रदर्शन रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में सोने के आयात और उससे जुड़े निर्यात का पूरा ब्योरा देना होगा। यह रिपोर्ट किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित करानी होगी ताकि जानकारी की सही तरीके से जांच हो सके। इसके अलावा डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालय भी हर महीने विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके मुख्यालय को भेजेंगे।

आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया

सरकार ने इससे पहले बुधवार को सोने और चांदी पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की थी। सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं प्लैटिनम पर यह शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि शुल्क बढ़ने से सोने और चांदी की खरीद कम होगी और आयात में गिरावट आएगी। इससे देश का व्यापार घाटा कम करने में मदद मिल सकती है।

क्यों उठाने पड़े ये कदम

पिछले कुछ समय से भारत में सोने और चांदी का आयात तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इनका आयात 26.7 प्रतिशत बढ़कर 102.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। कुल आयात में इनकी हिस्सेदारी भी 11.8 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के भारी आयात की वजह से देश की विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ रहा है। इसी कारण रुपया भी कमजोर हुआ और मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.75 तक पहुंच गया था। हालांकि, सरकार द्वारा शुल्क बढ़ाने की घोषणा के बाद रुपये में थोड़ी मजबूती देखने को मिली।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी की थी अपील

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए देश को कुछ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। यहां बड़ी मात्रा में सोने का इस्तेमाल आभूषण उद्योग में होता है। ऐसे में सोने का आयात देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर डालता है। सरकार के नए फैसलों को इसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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