घर खरीदते समय खरीदारों को प्रॉपर्टी की कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और दूसरे कई खर्चों की तैयारी करनी पड़ती है। ऐसे में अगर बिल्डर पजेशन से पहले मेंटेनेंस चार्ज भी मांग ले, तो खरीदार के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह रकम देना जरूरी है? दरअसल, पजेशन से पहले मेंटेनेंस मांगना हर मामले में गलत नहीं माना जा सकता, लेकिन पैसे देने से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच करना बेहद जरूरी है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं क्या है RERA का नियम?
सबसे पहले Sale Agreement देखें
मेंटेनेंस चार्ज को लेकर सबसे पहले अपने बिक्री समझौते यानी सेल एग्रीमेंट को देखना चाहिए। रेरा पूरे देश के लिए मेंटेनेंस चार्ज की कोई एक तय दर या एक फॉर्मूला निर्धारित नहीं करता। मेंटेनेंस की रकम, कितने समय की अग्रिम राशि ली जाएगी और इसे किस तरह वसूला जाएगा, यह प्रोजेक्ट और संबंधित राज्य के नियमों के साथ समझौते पर निर्भर कर सकता है। इसलिए बिल्डर जो रकम मांग रहा है, उसे समझौते में लिखी शर्तों से जरूर मिलाएं।
अगर बिल्डर एक बड़ी रकम एक साथ मांग रहा है, तो उससे लिखित में पूरा हिसाब मांगें। इसमें मेंटेनेंस की दर, कितने महीनों या वर्षों के लिए पैसा लिया जा रहा है और किन सेवाओं के लिए यह रकम ली जा रही है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। कई बार मेंटेनेंस के अलावा कॉरपस फंड, सिंकिंग फंड या सुविधा प्रबंधन शुल्क जैसी अलग-अलग रकम भी मांगी जा सकती है। इन सभी शुल्कों का अलग-अलग पूरा विवरण लेना जरूरी है।
ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी है जरूरी
मेंटेनेंस से जुड़ा एक अहम मुद्दा ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट यानी ओसी है। यह इस बात से जुड़ा होता है कि प्रोजेक्ट या उसके संबंधित हिस्से में कानूनी रूप से पजेशन देने की स्थिति बनी है या नहीं। इसलिए केवल बिल्डर की तरफ से दिया गया कोई पजेशन पत्र या घर में इंटीरियर का काम शुरू करने की अनुमति मिलना हमेशा कानूनी पजेशन के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
कुछ राज्य रेरा मामलों में भी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट और वैध पजेशन से जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर, हरियाणा रेरा के एक आदेश में कहा गया कि ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद वैध पजेशन होने पर ही साझा क्षेत्रों के रखरखाव शुल्क की जिम्मेदारी आवंटी पर आती है।
मेंटेनेंस का पैसा कहां खर्च होगा?
अग्रिम मेंटेनेंस राशि का इस्तेमाल आमतौर पर सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट, बागवानी और साझा क्षेत्रों की देखभाल जैसी सेवाओं के लिए किया जाता है। लेकिन खरीदार को यह भी पूछना चाहिए कि उसके पैसे का हिसाब कैसे रखा जाएगा और कब से मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निवासियों की संस्था या सोसायटी को सौंप दी जाएगी।
इसलिए बिल्डर से केवल रकम बताने के बजाय उसका पूरा लिखित विवरण मांगें। भुगतान करने के बाद मांग पत्र, समझौता, रसीद और बिल्डर के साथ हुई बातचीत के रिकॉर्ड को संभालकर रखें।
क्या मेंटेनेंस देने से मना कर सकते हैं?
सिर्फ यह सोचकर हर मेंटेनेंस मांग को मना करना भी सही नहीं है कि जब तक चाबी हाथ में नहीं आएगी, तब तक कोई मेंटेनेंस नहीं देना है। अगर जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं, वैध पजेशन का प्रस्ताव दिया गया है और समझौते में उस चरण से मेंटेनेंस देने की शर्त साफ लिखी है, तो खरीदार पर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी बन सकती है, भले ही वह खुद पजेशन लेने में देरी करे।
वहीं अगर बिल्डर की मांग समझौते या लागू रेरा नियमों से मेल नहीं खाती, तो खरीदार लिखित में आपत्ति दर्ज करा सकता है और बिल्डर से स्पष्टीकरण मांग सकता है। मामला हल नहीं होने पर संबंधित राज्य रेरा प्राधिकरण में शिकायत की जा सकती है। इसलिए पजेशन से पहले मेंटेनेंस का पैसा देने से पहले समझौता, ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट, प्रोजेक्ट की मंजूरियां और शुल्क का पूरा हिसाब जरूर जांचें।
