Gold Vs Gold ETF: रिटेल मार्केट में सोने की कीमतें 58 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा पहुंच गई हैं। और अगर पिछले एक महीने में कीमतों के मूवमेंट को देखा जाय तो वह एक महीने के स्तर पर हैं। वहीं अगर अक्टूबर 2022 से कीमतों की तुलना की जाय तो अभी भी सोना 10-12 फीसदी का रिटर्न दे रहा है। आम तौर पर भारत में सोने को एक लंबी अवधि के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन उसकी शुद्धता और ज्वैलरी पर लगने वाले मेकिंग चार्ज की वजह से कई बार छोटे ग्राहकों के लिए यह छोटी अवधि में फायदेमंद नहीं रह जाता है। इसे देखते हुए गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी लोगों के सामने आ चुके हैं। जहां पर निवेशकों को शुद्धता और मेकिंग चार्ज जैसी दुविधा नहीं रहती है।
सोने से कितना अलग है गोल्ड ETF
Gold ETF के जरिए निवेशक का पैसा शेयर बाजार में निवेश होता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर इसके जरिए कारोबार किया जाता है। जिसकी वैल्यू गोल्ड की कीमतों के आधार पर तय होती है। अहम बात यह है कि इसमें शुद्धता को लेकर कोई चिंता नहीं रहती है। क्योंकि यह गोल्ड की तरह फिजिकल फॉर्म में नहीं होता है। बल्कि इसके एक यूनिट की कीमत एक ग्राम गोल्ड की कीमत के बराबर होती है। साथ ही इसमें निवेश के लिए डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। एक अहम बात और है कि गोल्ड ETF में निवेश के लिए मेकिंग चार्ज भी नहीं देना पड़ता है। वहीं ईटीएफ में निवेश के समय औसतन एक फीसदी मैनेजमेंट चार्ज देना पड़ता है।
कर्ज भी लिया जा सकता है
चूंकि गोल्ड ETF के लिए 99.5% या इससे अधिक शुद्धता की गारंटी होती है। इसलिए बिक्री के समय अच्छे रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। बल्कि कर्ज के लिए गोल्ड ईटीएफ को भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे गारंटी के रूप में रखकर कर्ज लिया जा सकता है।
जहां तक गोल्ड की बात है तो ज्वैलरी की खरीद कीमत और बिक्री की कीमत में हमेशा अंतर होता है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति ज्वैलरी को बेचने जाता है, तो ज्वैलर्स मेकिंग चार्ज और शुद्दता के आधार पर कीमत तय करते हैं।
