Go First filed Bankruptcy, CEO tells the future plan to employees: आर्थिक संकट में फंसी Go First ने दिवालिया होने के लिए अप्लाई कर दिया है। कंपनी का हालत ऐसी है कि उसके पास उड़ान भर के लिए पैसा ही नहीं है। अकेले बैंकों का 6,521 करोड़ रु का कर्ज है। ऐसे में एक बार फिर भारत में एक और एयरलाइंस के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। क्या एयरलाइन बंद हो जाएगी। यह सवाल यात्रियों, इंडस्ट्री से ज्यादा वहां के कर्मचारियों को खाया जा रहा है। इस संबंध में कंपनी के CEO कौशिक खोना ने कर्मचारियों के नाम एक मैसेज दिया है। जिसमें उन्होंने कंपनी के मौजूदा संकट और आगे की योजना के बारे विस्तार से जानकारी दी है।
क्यों खड़ा हुआ संकट
कौशिक खोना ने कहा है कि प्रैट एंड व्हिटनी इंजन में बार-बार आने वाली दिक्कतों की वजह से आज एयरलाइन के समक्ष यह संकट पैदा हुआ है। इंजन की आपूर्ति करने में विफल रहने से गंभीर संकट खड़ा हो गया है।उन्होंने कहा कि एयरलाइन प्रबंधन एक साल से प्रैट एंड व्हिटनी को अतिरिक्त इंजन उपलब्ध कराने और उनकी मरम्मत के लिए कह रहा है। लेकिन इसके बावजूद कंपनी बातचीत को बाधित कर रही है।खोना ने कहा कि ऐसे में एयरलाइन ने इस मामले में सिंगापुर में आपात रुप से मध्यस्थता के लिए कदम उठाया है।
उन्होंने बताया कि आर्बिटरी ने प्रैट एंड व्हिटनी को 27 अप्रैल तक कम से कम 10 सेवा योग्य अतिरिक्त इंजन पट्टे पर देने को कहा था। इसके अलावा दिसंबर, 2023 तक 10 और अतिरिक्त इंजन पट्टे पर देने का आदेश दिया था। अगर ऐसा होता तो अगस्त-सितंबर, 2023 तक एयरलाइन के सभी ए320 नियो विमान परिचालन में होते। लेकिन दुर्भाग्य से, प्रैट एंड व्हिटनी ने आपात मध्यस्थता आदेश का अनुपालन नहीं किया।
अमेरिका में की है अपील
उन्होंने कहा कि इसके बाद एयरलाइन ने एक बार फिर आर्बिटरी से संपर्क किया, जिसने अपने आदेश का फिर से अनुपालन करने को कहा है। इसके बावजूद प्रैट एंड व्हिटनी आदेश को मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में एयरलाइन ने अमेरिका की अदालत में कार्रवाई के लिए अपील की है।इंजन के मुद्दे की वजह से एयरलाइन के आधे से ज्यादा विमान खड़े हैं।खोना ने कहा कि बेड़े का आकार घटने के साथ एयरलाइन पट्टे पर विमान देने वालों के भुगतान के लिए राजस्व नहीं जुटा पा रही है। वहीं पट्टेदार एयरलाइन के खिलाफ जबरिया कार्रवाई कर रहे हैं। वे अपने विमान वापस मांग रहे हैं।
और कोई विकल्प नहीं बचा था
उन्होंने कहा कि इस स्थिति में एयरलाइन के पास स्वैच्छिक दिवाला समाधान कार्यवाही के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसका मकसद प्रभावी कदमों के जरिये कंपनी को परिचालन में बरकरार रखना है।सीईओ ने कर्मचारियों को गो गेटर्स के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि हम आपको भरोसा दिलाना चाहते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। हम सभी कर्मचारियों को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि एक बार अंतरिम राहत के लिए आईबीसी की धारा 10 के तहत आवेदन पर विचार के बाद हम कार्रवाई योजना के बारे में अवगत कराने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे। जैसे ही हमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से आदेश मिलेगा हम इसकी जानकारी देंगे।
