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ईरान युद्ध से बेहाल यूरोप, सिर्फ इतने दिन का बचा है हवाई जहाज के लिए फ्यूल, IEA चीफ ने दी चेतावनी

Fatih Birol ने कहा, अब सच में हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं, और इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। यह संकट जितना लंबा चलेगा, उतना ही दुनिया में आर्थिक विकास धीमा होगा और महंगाई बढ़ती जाएगी।”

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चीफ ने कहा कि अगर Strait of Hormuz दोबारा नहीं खोला गया, तो यूरोप में जल्द ही ऐसी खबरें आ सकती हैं। (फोटो क्रेडिट-iStock)

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख ने गुरुवार को एक इंटरव्यू में कहा कि यूरोप के पास सिर्फ करीब 6 हफ्तों या उससे थोड़ा ज्यादा का जेट फ्यूल बचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई बंद रहती है, तो जल्द ही उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं।

IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Fatih Birol ने दुनिया पर पड़ने वाले गंभीर असर के बारे में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह 'अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट' हो सकता है। यह संकट Strait of Hormuz से तेल, गैस और जरूरी चीजों की सप्लाई रुकने की वजह से पैदा हुआ है।

सच में हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं

Fatih Birol ने कहा, अब सच में हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं, और इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। यह संकट जितना लंबा चलेगा, उतना ही दुनिया में आर्थिक विकास धीमा होगा और महंगाई बढ़ती जाएगी।” उन्होंने बताया कि इसका असर 'पेट्रोल (गैसोलीन) की कीमतों में बढ़ोतरी, गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी' के रूप में दिखेगा।

उन्होंने कहा कि आर्थिक परेशानी का असर हर देश पर एक जैसा नहीं पड़ेगा, कुछ देशों को दूसरों के मुकाबले ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने Japan, South Korea, India, China, Pakistan और Bangladesh का नाम लेते हुए कहा कि ये देश इस ऊर्जा संकट का सबसे ज़्यादा असर झेल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन देशों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, उनकी आवाज ज्यादा सुनी भी नहीं जाती। ये ज्यादातर विकासशील देश होंगे, जैसे एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के गरीब देश। “फिर यह यूरोप और अमेरिका तक पहुंचेगा,”।

फ्यूल की कमी की वजह से उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं

उन्होंने कहा कि अगर Strait of Hormuz दोबारा नहीं खोला गया, तो यूरोप में जल्द ही ऐसी खबरें आ सकती हैं कि जेट फ्यूल की कमी के कारण शहर A से शहर B जाने वाली कुछ उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं। Fatih Birol ने ईरान के उस “टोल बूथ” सिस्टम का विरोध किया, जिसमें कुछ जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए फीस देनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अगर यह सिस्टम स्थायी हो गया, तो यह एक गलत मिसाल बन सकती है। बाद में इसे एशिया के अहम Strait of Malacca जैसे दूसरे महत्वपूर्ण जलमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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