EPF Interest Rate: कर्मचारी भविष्य निधि के लिए करोड़ों खाताधारकों के लिए अगले दो दिन बेहद अहम है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT)2022-23 के लिए ब्याज दरों की घोषणा कर सकता है। इसके तहत ऐसी संभावना है कि एक बार फिर ब्याज दरें 8 फीसदी के आसपास रह सकती है। साल 2021-22 के लिए सरकार ने EPF पर 8.1 फीसदी ब्याज दर का ऐलान किया था। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बाद ब्याज दरों में मामूली कटौती हो सकती है। और वह 8 फीसदी के स्तर पर रह सकती है। अगर ऐसा होता है तो EPFपर ब्याज दरें 1977-78 के स्तर पर आ जाएंगी।
2018-19 से लगातार घट रही हैं ब्याज दरें
EPF पर ब्याज दरों का ट्रेंड देखा जाय तो यह साल 2018-19 से लगातार घट रही है। उस वक्त ब्याज दरें 8.65 फीसदी के स्तर पर थीं। जो 2021-22 तक आकर 8.1 फीसदी पर आ गई है। और इस बात की संभावना है कि इस बार ब्याज दरें 8.1 फीसदी के आसपास ही रह सकती है। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बार की बैठक में ब्याज दरें 8 फीसदी के करीब करने का फैसला हो सकता है। सोमवार (27 मार्च) को शुरू हुई मीटिंग मंगलवार तक चलने की उम्मीद है। और उसी दिन ब्याज दरों पर फैसला आ सकता है।
पीटीआई के अनुसार इस बैठक में पेंशन की खातिर आवेदन देने के लिए उच्चतम न्यायालय ने चार महीने का वक्त देने संबंधी जो आदेश दिया था उस पर ईपीएफओ ने क्या कार्रवाई की है, इस बारे में भी चर्चा हो सकती है। ईपीएफओ ने अपने अंशधारकों को तीन मई, 2023 तक का वक्त दिया है।
एक समय 12 फीसदी मिलता था ब्याज
ईपीएफ के इतिहास को देखा जाय तो अभी तक सबसे ज्यादा ब्याज 1989-90 से लेकर 1999-2000 तक मिला है। साल 1989-90 में 12 फीसदी ब्याज की घोषणा की गई थी। जो कि साल 1999-2000 तक जारी रही। और उसके बाद इसमें गिरावट का दौर शुरु हुआ। और फिर वह 9.50 फीसदी पहुंच गया और उसके बाद 2021-22 में घटते हुए 8.1 फीसदी पर आ गया। 31 मार्च, 2022 तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का कुल निवेश 11 लाख करोड़ रुपये था।
क्या है कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)
यह स्कीम प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए है। जिस कंपनी में 20 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, उन पर यह नियम लागू होता है। इसके तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 फीसदी हिस्सा पीएफ फंड में जमा किया जाता है और इतना ही हिस्सा नियोक्ता की ओर से भी जमा किया जाता है। हालांकि नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 फीसदी राशि कर्मचारी पेंशन योजना में जमा की जाती है। जबकि शेष 3.67 फीसदी राशि EPF में निवेश की जाती है। रिटायरमेंट के बाद पीएफ का पैसा कर्मचारियों को एकमुश्त और ईपीएस का पैसा पेंशन के तौर पर मिलता है
