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नौकरी के लिए अब डिग्री नहीं, स्किल चाहिए! 10वीं फेल भी इन सेक्टर्स में पा सकते हैं नौकरी

Low-Education Jobs: भारतीय नौकरी बाजार अब एक स्किल‑फर्स्ट अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, 10वीं से भी कम पढ़ा-लिखा होना अब बहुत सी नौकरियों की सबसे अधिक पसंदीदा क्वालिफिकेशन बन चुकी है। अब ऐसे पदों पर ट्रेनिंग और ऑनबोर्डिंग को लेकर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जहां काम जल्दी सीखा जा सके और सीधे उत्पादन में लगाया जा सके।

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भारतीय नौकरी बाजार एक स्किल‑फर्स्ट अर्थव्यवस्था की ओर (Photo : iStock)

Low-Education Jobs: क्या आपको भी लगता है एक अच्छी नौकरी पाने के लिए अधिक पढ़ा-लिखा होना एक पहली और जरूरी शर्त है। अगर हां, तो आपकी यह सोच एक लेटेस्ट रिपोर्ट के साथ बदल सकती है। वर्कइंडिया की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, 10वीं से भी कम पढ़ा-लिखा होना अब बहुत सी नौकरियों की सबसे अधिक पसंदीदा क्वालिफिकेशन बन चुकी है, जो भारतीय लेबर मार्केट की दिशा बदलने का संकेत है।

बदल रही नौकरियों की जरूरत

पहले शिक्षा को नौकरी का एक मजबूत संकेतक माना जाता था, क्योंकि यह अनुशासन, मूल साक्षरता और सीखने की क्षमता को दर्शाता था। लेकिन अब कंपनियां ऐसे पदों पर ट्रेनिंग और ऑनबोर्डिंग को लेकर अधिक ध्यान दे रही हैं, जहां काम जल्दी सीखा जा सके और सीधे उत्पादन में लगाया जा सके। इस बदलाव से पारंपरिक शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी बढ़ रही है।

कौशल को दी रही प्राथमिकता

विशेष रूप से डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स, टेलीकॉलिंग और वेयरहाउस ऑपरेशंस जैसे उच्च‑वॉल्यूम सेक्टर में सीधे कौशल को प्राथमिकता दी जा रही है। नतीजतन, वर्कफोर्स में छोटे शहरों और टियर‑II, टियर‑III शहरों में भी नौकरी का विस्तार हो रहा है, लेकिन यह अधिकतर कम‑स्किल्ड और कम‑मोबिलिटी वाले पदों तक सीमित है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते दिखते हैं।

जेंडर असमानता का भी जिक्र

इस ट्रेंड के एक और पहलू में जेंडर असमानता का भी जिक्र है, क्योंकि जब ऑफिशियल शैक्षिक आवश्यकता हट जाती है, तो अनौपचारिक भेदभाव बढ़ने लगता है। उदाहरण के लिए, डिलीवरी जैसे कामों में पुरुषों को अधिक प्राथमिकता मिलती है, जबकि टेलीकॉलिंग जैसे रोल अक्सर महिलाओं के लिए अपेक्षित होते हैं, जिससे बाजार में लिंग के आधार पर विभाजन बढ़ता है।

सवाल यह है कि अगर बाजार भविष्य में शिक्षा को नौकरी के लिए वास्तव में अप्रासंगिक मानने लगे तो युवा और छात्र अपनी पढ़ाई और करियर निवेश को कैसे देखें? इससे स्कूल ड्रॉप‑आउट की दर बढ़ सकती है, क्योंकि युवा सोच सकते हैं कि पढ़ाई में समय और संसाधन लगाना जरूरी नहीं है।

भारतीय नौकरी बाजार स्किल‑फर्स्ट अर्थव्यवस्था की ओर

भारतीय नौकरी बाजार अब एक स्किल‑फर्स्ट अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां व्यावहारिक कौशल और तत्परता को ऐकडेमिक डिग्री से अधिक महत्व दिया जा रहा है। लेकिन अगर यह बदलाव स्किलिंग फ्रेमवर्क, ट्रेनिंग और करियर प्रगति की योजना के साथ संतुलित नहीं होगा, तो यह एक ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जहां नौकरी के बावजूद उन्नति की राह कठिन होगी।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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