Gold price On Dhanteras 2024 vs 2025 : एक साल पहले, भारत में 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत ₹76,250 हुआ करती थी। लेकिन 2025 में आते-आते, यह पीली धातु अपने उच्चतम से उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। इस साल अब तक 35 अधिक बार उच्च कीमतों का नया रिकॉर्ड बना चुका है। खासकर अगस्त 2025 से सोने में जो जबरदस्त तेजी देखी गई है उसने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के मुताबिक शुक्रवार को बाजार बंद होने तक 24 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,29,584 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक दिल्ली में सोने की कीमत 3,200 रुपये बढ़कर 1,34,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो तेजी दर्ज की गई, वह 2008 के बाद की सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।
एक साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल
अगर पिछले साल की बात करें तो 17 अक्टूबर 2024 को 24 कैरेट सोने की कीमत ₹76,250 प्रति 10 ग्राम थी। वहीं 22 कैरेट की कीमत ₹71,583 और 18 कैरेट की कीमत ₹58,555 थी। लेकिन ठीक एक साल बाद 17 अक्टूबर 2025 को यही 24 कैरेट सोना ₹1,29,584 तक पहुंच गया है। 22 कैरेट की कीमत ₹118699 और 18 कैरेट ₹97188 हो चुकी है। आज 18 अक्टूबर को शनिवार है, इसलिए बाजार बंद होने की वजह से 17 अक्टूबर वाला भाव मान्य रहेगा।
यह तेजी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सोने में हालिया $1,000 की तेजी सिर्फ 207 दिनों में आई है। तुलना करें तो जब सोना $1,000 से $2,000 पहुंचा, तो इसमें करीब 15 साल लग गए थे। फिर अगला $1,000 उछाल (यानी $3,000 तक) सिर्फ 14 महीनों में मार्च 2025 तक पूरा हुआ। उसके बाद भी सोना और $1,000 बढ़ चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हालिया तेजी बहुत ही तेजी से हो रही है।
भारत में पिछले 60 वर्षों में सोने की कीमतें
इतिहास यह बताता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुछ भी अकेले नहीं घटता। सोने की कीमतों पर मुद्रास्फीति (महंगाई), वैश्विक व्यापार, कच्चे तेल की आपूर्ति, वस्तु चक्र, और भू-राजनीतिक घटनाएं गहरा प्रभाव डालती हैं। इसी कारण, पिछले 60 वर्षों में भारत में सोने की कीमतें समय के साथ-साथ लगातार बढ़ी हैं। यह भी कहा जाता है कि एक समय ऐसा भी था जब भारत में 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 63.24 रुपये था।
सोना क्यों बन गया है सुरक्षित निवेश का प्रतीक?
कोविड-19 महामारी (2020) के बाद से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई झटके लगे हैं। 2022 से शुरू होकर रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान तनाव, अमेरिका-चीन व्यापार विवाद, और वेस्ट एशिया में इजराइल-हमास और इजराइल-ईरान युद्ध जैसी घटनाओं ने दुनियाभर की वित्तीय स्थिरता को हिला कर रख दिया है।
इन अनिश्चितताओं के दौर में, लोग अब शेयर बाजार और अन्य जोखिमभरे निवेशों से दूर हटते जा रहे हैं। ऐसे में, सोना एक बार फिर निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनकर उभरा है। इसकी मांग में जबरदस्त उछाल आया है, और विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक इसमें और तेजी देखी जा सकती है।
