हर किसी का सपना होता है कि एक उम्र के बाद उसके पास इतना पैसा हो कि उसे आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। अगर आप 45 साल की उम्र तक करोड़पति बनने का लक्ष्य रखते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है 'जल्दी शुरुआत'। निवेश की दुनिया में 'कंपाउंडिंग' (चक्रवृद्धि ब्याज) का जादू तभी काम करता है जब आप अपने पैसे को बढ़ने के लिए लंबा समय देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप 20 या 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करते हैं, तो 45 की उम्र तक पहुंचने के लिए आपके पास 20 साल का समय होता है, जो एक बड़ा फंड बनाने के लिए पर्याप्त है।
निवेश में डिसिप्लिन
करोड़पति बनना केवल किस्मत का खेल नहीं है, बल्कि यह आपके निवेश के अनुशासन पर निर्भर करता है। अक्सर लोग जोश में निवेश शुरू तो कर देते हैं, लेकिन बाजार की मामूली गिरावट को देखकर डर जाते हैं या अपनी एसआईपी (SIP) रोक देते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 45 की उम्र तक बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए आपको अपने निवेश को लेकर अडिग रहना होगा। चाहे बाजार ऊपर जाए या नीचे, आपकी निवेश प्रक्रिया बिना रुके चलती रहनी चाहिए। यही वह अनुशासन है जो एक औसत निवेशक को सफल निवेशक से अलग बनाता है।
एसेट एलोकेशन
केवल बचत करना काफी नहीं है, बल्कि सही जगह निवेश करना जरूरी है। 45 साल की उम्र तक 1 करोड़ का फंड जुटाने के लिए आपको इक्विटी (Equity) जैसे विकल्पों पर भरोसा करना होगा, क्योंकि लंबे समय में महंगाई को मात देने वाला रिटर्न यहीं मिलता है। हालांकि, रिस्क को कम करने के लिए आपको 'एसेट एलोकेशन' का ध्यान रखना चाहिए, जिसमें आप अपना पैसा शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, डेट फंड और गोल्ड जैसे अलग-अलग विकल्पों में बांट कर लगाते हैं। जैसे-जैसे आप अपने लक्ष्य की उम्र के करीब पहुंचें, धीरे-धीरे रिस्क कम करते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए।
स्टेप-अप एसआईपी का कमाल
जैसे-जैसे आपकी आय बढ़ती है, वैसे-वैसे आपका निवेश भी बढ़ना चाहिए। इसे 'स्टेप-अप एसआईपी' कहते हैं। यदि आप हर साल अपने निवेश की राशि में 5% या 10% की बढ़ोतरी करते हैं, तो आप अपने लक्ष्य को तय समय से पहले भी हासिल कर सकते हैं। यह छोटी सी बढ़ोतरी भविष्य में आपके कॉर्पस (कुल जमा राशि) में लाखों रुपये का अंतर पैदा कर सकती है।
खर्चों पर लगाम और इमरजेंसी फंड
अमीर बनने के सफर में गैर-जरूरी खर्चे सबसे बड़े दुश्मन होते हैं। अपनी जीवनशैली पर नियंत्रण रखना और दिखावे के खर्चों से बचना निवेश के लिए अधिक फंड बचाने में मदद करता है। साथ ही, एक 'इमरजेंसी फंड' का होना भी अनिवार्य है। यदि अचानक कोई जरूरत पड़ जाए, तो आपका निवेश प्रभावित नहीं होना चाहिए। एक सुरक्षित इमरजेंसी फंड यह सुनिश्चित करता है कि आपकी निवेश यात्रा बिना किसी रुकावट के चलती रहे।
