कब्ज से राहत पाने के लिए आहार में फाइबर का होना भी बेहद जरूरी है। फाइबर मल को भारी और मुलायम बनाता है, जिससे वह आंतों में आसानी से आगे बढ़ता है। अगर आप पर्याप्त पानी पीते हैं लेकिन फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज नहीं खाते, तो कब्ज बनी रह सकती है।
पानी पीने के साथ-साथ शरीर का सक्रिय होना भी पाचन तंत्र के लिए आवश्यक है। जब आप दिन भर एक ही जगह बैठे रहते हैं या कसरत नहीं करते, तो आंतों की स्वाभाविक गति धीमी पड़ जाती है। शारीरिक गतिविधि आंतों की मांसपेशियों को सक्रिय करती है, जिससे पाचन सुचारू रहता है।
दिमाग और आंतों का गहरा संबंध होता है, जिसे 'गट-ब्रेन एक्सिस' कहा जाता है। जब आप अत्यधिक मानसिक तनाव या चिंता में होते हैं, तो शरीर का पाचन तंत्र प्रभावित होता है। तनाव के कारण आंतों की सिकुड़ने की क्षमता धीमी हो जाती है, जिससे खूब पानी पीने के बावजूद पेट साफ नहीं होता।
चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन डिहाइड्रेशन को बढ़ावा दे सकता है। भले ही आप अलग से पानी पी रहे हों, लेकिन कैफीन का ज्यादा सेवन आंतों में नमी को कम कर देता है। इसके अलावा, कैफीन और प्रोसेस्ड फूड्स का ज्यादा इस्तेमाल पेट के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है।
कई बार कुछ खास दवाइयों का सेवन कब्ज का कारण बन जाता है। पेनकिलर्स, एंटी-डिप्रेशेंट्स, आयरन सप्लीमेंट्स या ब्लड प्रेशर की दवाएं आंतों की गति को धीमा कर देती हैं। अगर आप पानी पर्याप्त मात्रा में ले रहे हैं, तब भी इन दवाइयों के साइड इफेक्ट की वजह से मल सख्त हो सकता है।
गलत समय पर पानी पीना पानी पीने का तरीका और समय भी बहुत मायने रखता है। खाना खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी पीने से पाचक एंजाइम पतले हो जाते हैं, जिससे भोजन सही से नहीं पचता। इसके अलावा, पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीने के बजाय एक बार में बहुत सारा पानी पी लेने से भी पाचन क्रिया प्रभावित होती है।
हार्मोन का असंतुलन शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। मेटाबॉलिज्म सुस्त होने से पाचन प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। ऐसे मामलों में सिर्फ पानी पीना समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, बल्कि मेडिकल जांच की जरूरत होती है।