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ET NOW के 17वें स्थापना दिवस पर जुटे देश के दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट्स, भारत की ग्रोथ पर हुआ मंथन

भारत के लीडिंग इंग्लिश बिजनेस न्यूज चैनल ET NOW ने अपने 17 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ET NOW Markets Summit 2026 का आयोजन किया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई।

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सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे

भारत के लीडिंग इंग्लिश बिजनेस न्यूज चैनल ET NOW ने निवेशकों को सशक्त बनाने और भारत की विकास यात्रा को बढ़ावा देने के अपने 17 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ET NOW Markets Summit 2026 का आयोजन किया। भारत के निवेश और पूंजी बाजार के भविष्य को लेकर चर्चा के लिए आयोजित ET NOW Markets Summit 2026 में देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों, बाजार विशेषज्ञों, फंड मैनेजरों और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का विषय Navigating Volatility, Decoding Opportunities था, जिसमें वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेश के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई।

एआई आधारित निर्णयों में मानव निगरानी जरूरी

सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे (Tuhin Kanta Pandey) ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भविष्य में भारतीय पूंजी बाजार नियमन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेबी पूंजी बाजार में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल के लिए एक विशेष ढांचा तैयार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई आधारित निर्णयों में Human-in-the-Loop (HITL) यानी मानव निगरानी जरूरी होगी। उनके अनुसार AI निगरानी, जोखिम मूल्यांकन, धोखाधड़ी की पहचान और निवेशक सेवाओं को बेहतर बना सकता है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।

भारतीय बाजार और निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ

भारतीय बाजार की मजबूती पर बात करते हुए तुहिन कांत पांडे ने कहा कि पिछले कुछ समय में टैरिफ विवाद, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, AI से जुड़ी चुनौतियां और विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली जैसी कई बाधाएं सामने आईं, लेकिन भारतीय बाजार और निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहा। उन्होंने बताया कि भारतीय पूंजी बाजार ने इक्विटी और कॉरपोरेट बॉन्ड के माध्यम से 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाने में मदद की है और आईपीओ पाइपलाइन भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एसआईपी निवेश का हिस्सा लगभग 21 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और बाजार की अस्थिरता से निवेशकों का विश्वास प्रभावित नहीं होना चाहिए।

निवेशकों को मल्टी-एसेट एलोकेशन की सलाह

सम्मेलन के दौरान LIC के प्रबंध निदेशक दिनेश पंत ने निवेशकों को मल्टी-एसेट एलोकेशन की सलाह दी। उनके अनुसार, निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास में बांटने से जोखिम कम होता है और निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भारतीय शेयर बाजार में एक मजबूत सहारा बनकर उभरे हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद उन्होंने बाजार में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अगले 12 महीनों में देश बड़े कैपेक्स बूम के दौर में करेगा प्रवेश

वहीं India: Weathering The Macro Storm शीर्षक वाले सत्र में Morgan Stanley India के एमडी और मुख्य इक्विटी रणनीतिकार रिधम देसाई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने कहा कि रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) के आधार पर रुपया लगभग 11 प्रतिशत अंडरवैल्यूड दिखाई देता है, जो इक्विटी निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर पैदा करता है। उनके अनुसार, भारत में पहली तिमाही में करीब 12 प्रतिशत आय वृद्धि दर्ज की गई है और अगले 12 महीनों में देश बड़े कैपेक्स बूम के दौर में प्रवेश कर सकता है, जिससे बाजार को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बॉन्ड, FCNR(B) और ECB से जुड़े उपाय भारत की भुगतान संतुलन (Balance of Payments) स्थिति को मजबूत करने में मदद करेंगे।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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