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RBI की VRR नीलामी पर बैंकों की सुस्त प्रतिक्रिया, कैश घटने के बावजूद उत्साह क्यों नहीं

VRR Auction: आरबीआई की एक लाख करोड़ की वीआरआर नीलामी में बैंकों ने सिर्फ 16,750 करोड़ की बोली लगाई, जिससे बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक फंड की सीमित मांग का संकेत मिला।

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आरबीआई के वीआरआर नीलामी में बैंकों की मांग सुस्त

Photo : iStock

VRR Auction: Reserve Bank of India (आरबीआई) की एक लाख करोड़ रुपये की तीन दिन की परिवर्ती दर रेपो (Variable Rate Repo) नीलामी को शुक्रवार को बैंकों की अपेक्षाकृत कमजोर प्रतिक्रिया मिली। यह संकेत देता है कि फिलहाल बैंकिंग प्रणाली में अल्पकालिक धन की मांग सीमित बनी हुई है। आरबीआई ने इस नीलामी के माध्यम से बैंकों को अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अधिसूचित राशि के मुकाबले सिर्फ 16,750 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक फिलहाल तत्काल नकदी जरूरत को लेकर ज्यादा दबाव में नहीं हैं।

एक लाख करोड़ के मुकाबले सिर्फ 16,750 करोड़ की बोली

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय वीआरआर नीलामी में कुल एक लाख करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई थी। हालांकि, बैंकों की ओर से सिर्फ 16,750 करोड़ रुपये की ही मांग सामने आई। केंद्रीय बैंक ने पूरी राशि को 5.26 प्रतिशत की कट-ऑफ और भारित औसत दर पर स्वीकार कर लिया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी कम भागीदारी यह दर्शाती है कि बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता अभी भी संतोषजनक स्तर पर बनी हुई है।

बैंकिंग सिस्टम में अधिशेष नकदी, लेकिन स्तर कम

आरबीआई के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक बैंकिंग प्रणाली में करीब 19,163.11 करोड़ रुपये का नकदी अधिशेष मौजूद था। हालांकि यह अधिशेष पिछले दिन के मुकाबले थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन इसका स्तर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि बैंकिंग सेक्टर में नकदी की स्थिति पूरी तरह सहज नहीं है और कुछ हद तक दबाव बना हुआ है।

आरबीआई लगातार कर रहा नकदी प्रबंधन

केंद्रीय बैंक का उद्देश्य अल्पकालिक नकदी प्रबंधन को संतुलित बनाए रखना और ओवरनाइट दरों को नीतिगत दर गलियारे के अनुरूप रखना है। इसी वजह से आरबीआई समय-समय पर वीआरआर नीलामियां आयोजित करता है। इस प्रक्रिया में बैंक अलग-अलग ब्याज दरों पर बोली लगाकर केंद्रीय बैंक से धन उधार लेते हैं। यह व्यवस्था बाजार में नकदी की कमी को दूर करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

पिछले कुछ दिनों में 1.89 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली

आरबीआई ने हाल के दिनों में बैंकिंग प्रणाली में नकदी दबाव को कम करने के लिए विभिन्न अवधियों की वीआरआर नीलामियों के जरिए लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपये की अस्थायी नकदी डाली है। इसमें 18 जून को दो अलग-अलग नीलामियों के माध्यम से 72,300 करोड़ रुपये, 16 जून को सात दिन की वीआरआर नीलामी के जरिए 89,440 करोड़ रुपये और 15 जून को ओवरनाइट नीलामी के जरिए 28,220 करोड़ रुपये शामिल हैं।

क्या संकेत देती है कम भागीदारी?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि वीआरआर नीलामी में कम भागीदारी यह दर्शाती है कि बैंकों के पास फिलहाल पर्याप्त लिक्विडिटी है और अल्पकालिक उधारी की जरूरत सीमित है। हालांकि, नकदी अधिशेष का स्तर कम होना यह भी बताता है कि भविष्य में यदि नकदी दबाव बढ़ता है तो आरबीआई को और अधिक हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले दिनों में आरबीआई की अगली नीतिगत रणनीतियों और बैंकिंग सेक्टर की नकदी स्थिति पर बनी रहेगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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