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इमरान खान की बहन की गिरफ्तारी से पाकिस्तान को रोजाना 120 अरब रुपये का नुकसान! जानिए कैसे?

पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर PTI के 27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च और अलीमा खान की गिरफ्तारी से तनाव बढ़ गया है, जिससे रोजाना 120 अरब रुपये के नुकसान की आशंका है।

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इमरान खान की रिहाई पर पाकिस्तान में आर-पार: अलीमा खान गिरफ्तार, ठप होगी अर्थव्यवस्था! (तस्वीर-x)

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर राजनीतिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) द्वारा 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले प्रशासन और पीटीआई के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। लाहौर पुलिस ने पीटीआई के संस्थापक इमरान खान की बहन अलीमा खान को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने चेतावनी दी है कि लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों और विरोध रैलियों से देश की पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को रोजाना भारी चपत लग सकती है।

इमरान खान की बहन अलीमा खान गिरफ्तार, लाहौर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को पुलिस बल ने लाहौर स्थित अलीमा खान के घर पर छापा मारकर उन्हें हिरासत में ले लिया। अलीमा खान की गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है जब पीटीआई कार्यकर्ता 27 सितंबर को राजधानी इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। पीटीआई का कहना है कि सरकार गिरफ्तारियों और पाबंदियों के जरिए उनके राजनीतिक आंदोलनों को कुचलने की कोशिश कर रही है। हालांकि, प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और आम जनता की आवाजाही को बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। इस गिरफ्तारी के बाद पीटीआई समर्थकों में आक्रोश और गहरा गया है।

प्रदर्शनों से रोजाना 120 अरब रुपये का आर्थिक नुकसान: वित्त मंत्री

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने एक टेलीविजन मैसेज में देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' के अनुसार, औरंगजेब ने कहा कि अगर यह विरोध प्रदर्शन और धरना लंबा खिंचता है, तो देश को हर दिन करीब 120 अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अनुमान सरकार की आर्थिक टीम और योजना आयोग द्वारा किए गए गहन अध्ययन पर आधारित है।

किस क्षेत्र को कितना पहुंचेगा नुकसान?

वित्त मंत्री द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस राजनीतिक गतिरोध का सबसे बुरा असर सर्विसेज (सेवा) सेक्टर पर पड़ेगा।

  • सर्विस सेक्टर:- इसमें वित्तीय सेवाएं, दूरसंचार, खुदरा व्यापार, परिवहन, थोक बाजार और हॉस्पिटैलिटी शामिल हैं, जिन्हें प्रतिदिन करीब 86 अरब रुपये का घाटा सहना पड़ सकता है।
  • उद्योग क्षेत्र:- औद्योगिक क्षेत्र को रोजाना करीब 25 अरब रुपये की चपत लगने का अनुमान है।
  • कृषि क्षेत्र:- कृषि क्षेत्र को प्रतिदिन करीब 9 अरब रुपये का नुकसान हो सकता है।

इसके अलावा, यदि यह विरोध प्रदर्शन आयोजित होता है, तो सरकार को करीब 17 अरब रुपये के राजस्व (राजस्व घाटे) का अतिरिक्त नुकसान भी होगा।

स्वयं को पहुंचाई जाने वाली चोट: औरंगजेब

वित्त मंत्री औरंगजेब ने इस संभावित आर्थिक व्यवधान को स्वयं को पहुंचाई जाने वाली चोट (self-inflicted pain) करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के कारण उच्च माल भाड़ा, बीमा दरों और आपूर्ति सीरीज (supply chain) में आ रही बाधाओं से जूझ रहा है। ऐसे दौर में देश के भीतर की नाकेबंदी स्थिति को और विकट बना देगी। उन्होंने आईटी (IT) सेक्टर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में हुए नागरिक अवज्ञा आंदोलनों के दौरान इंटरनेट सेवाओं में आई रुकावटों से आईटी निर्यात को भारी नुकसान पहुंचा था। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने विवाद बातचीत के जरिए सुलझाएं, क्योंकि आर्थिक नुकसान की अंतिम गाज आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों, मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों पर ही गिरती है।

27 सितंबर के 'इस्लामाबाद मार्च' की तैयारियां तेज

तमाम चेतावनियों के बावजूद पीटीआई ने 27 सितंबर को राष्ट्रव्यापी लामबंदी का आह्वान किया है। इस मार्च की मुख्य मांगें इमरान खान की जेल से तत्काल रिहाई, संविधान की सर्वोच्चता और देश में व्यापक राजनीतिक व संवैधानिक सुधार लागू करना हैं। पीटीआई का इरादा अपने समर्थकों के साथ राजधानी इस्लामाबाद में प्रवेश कर सरकार पर दबाव बनाने का है।

सरकार की सख्ती और सड़कों की नाकेबंदी

दूसरी तरफ, सरकार ने साफ कर दिया है कि पीटीआई प्रदर्शनकारियों को किसी भी कीमत पर संघीय राजधानी में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। 14 सितंबर को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि किसी भी राजनीतिक दल या उसके नेताओं को इस्लामाबाद की मुख्य सड़कों, राजमार्गों, इंटरचेंज, टोल प्लाजा या सरकारी इमारतों पर कब्जा करने अथवा आम नागरिकों के रास्ते रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने घोषणा की है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस्लामाबाद की ओर बढ़ने से रोका जाएगा। प्रशासन ने इस्लामाबाद और पड़ोसी शहर रावलपिंडी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है। सड़कों को ब्लॉक करने के लिए शिपिंग कंटेनर मंगाए गए हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बल तथा दंगा-रोधी उपकरण तैनात किए जा रहे हैं।

पेट्रोल टैक्स को लेकर जमात-ए-इस्लामी का भी मोर्चा

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के लिए चुनौतियां यहीं खत्म नहीं होतीं। पीटीआई के अलावा जमात-ए-इस्लामी (JI) ने भी सरकार द्वारा लगाए गए पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ इस्लामाबाद मार्च शुरू कर दिया है। जेआई के अमीर हाफिज नसीम-उर-रहमान ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने ईंधन पर से भारी टैक्स नहीं हटाया तो उनका आंदोलन और उग्र रूप ले लेगा। वर्तमान में सरकार पेट्रोल पर 114 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 100 रुपये प्रति लीटर का टैक्स वसूल रही है, जिससे जनता में पहले से ही भारी असंतोष है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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