Bank Dividend Rules: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा अपने शेयरधारकों को दिए जाने वाले लाभांश (डिविडेंड) को लेकर नए नियम जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को ‘वाणिज्यिक बैंक लाभांश की घोषणा और लाभ प्रेषण पर विवेकपूर्ण मानदंड, 2026’ नाम से निर्देश जारी किए। इन नियमों के अनुसार अब बैंक किसी भी वित्तीय वर्ष में अपने शुद्ध लाभ का अधिकतम 75 प्रतिशत तक ही लाभांश के रूप में वितरित कर सकेंगे। यह नई व्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होगी।
क्या होता है लाभांश (डिविडेंड)
लाभांश (डिविडेंड) वह राशि होती है जो कोई कंपनी या बैंक अपने मुनाफे में से शेयरधारकों को देती है। जब बैंक अच्छा मुनाफा कमाते हैं तो वे अपने निवेशकों को उसका कुछ हिस्सा लाभांश के रूप में देते हैं। लेकिन अब आरबीआई ने इस पर सीमा तय कर दी है ताकि बैंक अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनाए रख सकें और जरूरत के समय पूंजी की कमी न हो।
पूंजी की मजबूती भी जरूरी
आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक बैंक तभी लाभांश दे सकेंगे जब लाभांश भुगतान के बाद भी उनकी पूंजी नियामक पूंजी आवश्यकता से कम नहीं होगी। यानी बैंक को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके पास नियामकों द्वारा तय न्यूनतम पूंजी मौजूद है। इसके बाद ही वह शेयरधारकों को लाभांश दे पाएगा। इस नियम का मकसद बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाना है।
विदेशी बैंकों के लिए भी शर्त
भारत में शाखा के रूप में काम कर रहे विदेशी बैंकों के लिए भी आरबीआई ने स्पष्ट शर्त रखी है। यदि कोई विदेशी बैंक अपने मुख्यालय को लाभांश भेजना चाहता है, तो उस अवधि में उसका शुद्ध लाभ यानी कर चुकाने के बाद का मुनाफा सकारात्मक होना चाहिए। अगर बैंक को उस अवधि में घाटा हुआ है तो वह लाभांश नहीं भेज सकेगा।
75 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा भुगतान
आरबीआई के निर्देशों में साफ कहा गया है कि कोई भी बैंक निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद लाभांश घोषित कर सकता है, लेकिन कुल मिलाकर यह राशि उस अवधि के शुद्ध लाभ के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती जिसके लिए लाभांश प्रस्तावित किया जा रहा है। यानी बैंक चाहें तो 75 प्रतिशत से कम लाभांश दे सकते हैं, लेकिन इससे अधिक नहीं।
छोटे बैंकों के लिए भी नियम
केंद्रीय बैंक ने सिर्फ बड़े वाणिज्यिक बैंकों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य बैंकिंग संस्थानों के लिए भी लाभांश से जुड़े विवेकपूर्ण मानदंड तय किए हैं। इनमें छोटे वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक, भुगतान बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल हैं। इन संस्थानों को भी लाभांश घोषित करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और पूंजी की पर्याप्तता का ध्यान रखना होगा।
बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। कई बार बैंक ज्यादा लाभांश बांट देते हैं, जिससे भविष्य में पूंजी की कमी का खतरा बढ़ सकता है। नई सीमा तय होने से बैंक अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उसे व्यवसाय विस्तार या जोखिम से निपटने में इस्तेमाल कर सकेंगे।
इस तरह आरबीआई के नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक निवेशकों को लाभ भी दें और साथ ही अपनी वित्तीय मजबूती भी बनाए रखें। वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने वाले ये नियम बैंकिंग क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
