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देश के बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, 2026 में सरकारी बैंकों का होगा एकीकरण!

Public Sector Banks Merger: सरकार आने वाले सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण को तेज कर सकती है। इसका उद्देश्य 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत बड़े और विश्वस्तरीय बैंक बनाना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश को कई मजबूत वैश्विक स्तर के बैंकों की जरूरत है और इस दिशा में काम पहले ही शुरू हो चुका है।

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बड़े और ताकतवर बैंक बनाने की तैयारी, सार्वजनिक क्षेत्र में नई हलचल (तस्वीर-istock)

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Public Sector Banks Merger : सरकार आने वाले वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के एकीकरण की प्रक्रिया को और तेज कर सकती है। इसका मकसद 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करना है। सरकार चाहती है कि देश में ऐसे बड़े और मजबूत बैंक हों, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसी दिशा में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। इससे संकेत मिलते हैं कि अगले कुछ समय में बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

वित्त मंत्री का बयान और सरकार की मंशा

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था कि भारत को कई बड़े, विश्वस्तरीय बैंकों की जरुरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में काम पहले से ही शुरू हो चुका है। सरकार का मानना है कि बड़े बैंक न केवल देश की आर्थिक जरुरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत की मौजूदगी मजबूत कर सकते हैं। इसी वजह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

12 सार्वजनिक बैंक, लेकिन वैश्विक रैंकिंग में सीमित मौजूदगी

फिलहाल देश में 12 सरकारी बैंक हैं। परिसंपत्तियों के आधार पर दुनिया के टॉप 50 बैंकों में भारत से केवल भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ही शामिल है। एसबीआई इस लिस्ट में 43वें स्थान पर है। इसके बाद निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक 73वें स्थान पर आता है। सरकार का मानना है कि अगर बैंक बड़े होंगे तो उनकी वैश्विक रैंकिंग भी बेहतर होगी और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

पहले भी हो चुका है बड़ा एकीकरण

सरकार इससे पहले दो चरणों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण कर चुकी है। इन विलयों के बाद बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई। इस प्रक्रिया में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया गया। सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक में मिलाया गया। इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में और आंध्रा बैंक व कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय हुआ। इससे पहले देना बैंक और विजया बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में शामिल किया गया था। इन कदमों का मकसद बैंकों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना था।

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की तैयारी

सरकार ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव अरुणिश चावला ने उम्मीद जताई है कि इसकी रणनीतिक बिक्री मार्च 2026 तक पूरी हो सकती है। इससे सरकार को संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी और बैंकिंग सेक्टर में निजी भागीदारी बढ़ेगी।

सार्वजनिक बैंकों का रिकॉर्ड मुनाफा

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक इन बैंकों का शुद्ध लाभ दो लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर जाएगा। यह सुधार बेहतर प्रबंधन, कम एनपीए और मजबूत आर्थिक गतिविधियों का परिणाम माना जा रहा है।

निजी बैंकों में विदेशी निवेश का बढ़ता रुझान

दूसरी ओर, निजी बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ा है। जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन ने यस बैंक में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी 13,483 करोड़ रुपये में खरीदी है। यह सौदा सितंबर में पूरा हुआ। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात के एमिरेट्स एनबीडी बैंक ने आरबीएल बैंक में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी 26,853 करोड़ रुपये में खरीदने का फैसला किया है। इससे साफ है कि विदेशी निवेशक भारतीय बैंकिंग सेक्टर को लेकर काफी उत्साहित हैं।

बीमा क्षेत्र को भी मिला बढ़ावा

बीमा क्षेत्र में भी इस साल बड़े बदलाव हुए हैं। संसद ने ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ (बीमा कानून संशोधन) बिल 2025 पारित किया है। इससे बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का रास्ता साफ हो गया है। इसके अलावा, जीएसटी दरों में कटौती का फायदा भी बीमा कंपनियों को मिला है। इन कदमों से आने वाले समय में वित्तीय क्षेत्र में निवेश और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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