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F&O और इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए 31 जुलाई नहीं है ITR की लास्ट डेट, जानें क्या है आपकी सही तारीख

शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए आयकर विवरण (ITR) दाखिल करने के नियम सामान्य वेतनभोगी वर्ग से काफी अलग होते हैं। जानिए आपके लिए आईटीआर फाइलिंग की सही समय-सीमा क्या है।

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जानें क्या है आपके लिए ITR फाइलिंग की सही तारीख

भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) और इंट्राडे ट्रेडिंग में सक्रियता से भाग लेने वाले निवेशकों के लिए आयकर (Income Tax) से जुड़े नियमों को समझना बेहद आवश्यक है। आमतौर पर आम करदाताओं और वेतनभोगी (Salaried) कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष की आईटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई होती है। हालांकि, शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वाले ज्यादातर करदाताओं के लिए 31 जुलाई की समय-सीमा लागू नहीं होती या फिर उनके लिए प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग से होने वाली कमाई या नुकसान को 'कैपिटल गैन' (Capital Gain) के बजाय 'बिजनेस इनकम' (Business Income) की श्रेणी में गिना जाता है। इसी कारण ट्रेडर्स के लिए आईटीआर फॉर्म का चयन और फाइलिंग की समय-सीमा दोनों बदल जाती हैं।

ट्रेडर्स के लिए क्या हैं टैक्स नियम?

आयकर कानूनों के तहत इंट्राडे शेयर ट्रेडिंग को 'स्पेक्टेक्युलेटिव बिजनेस' (Speculative Business) माना जाता है, जबकि F&O (वायदा एवं विकल्प) ट्रेडिंग को 'नॉन-स्पेक्टेक्युलेटिव बिजनेस' (Non-Speculative Business) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह एक व्यावसायिक आय है, इसलिए ट्रेडर्स को ITR-1 या ITR-2 के स्थान पर ITR-3 या ITR-4 फॉर्म का उपयोग करना होता है। ऐसे मामलों में आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन इस बात पर निर्भर करती है कि निवेशक के खातों का टैक्स ऑडिट (Tax Audit) होना अनिवार्य है या नहीं। किसी ट्रेडर का टर्नओवर (Turnover) तय कानूनी सीमा से अधिक है या वे अपनी वास्तविक आय को पूर्वकल्पित कर (Presumptive Taxation Scheme - Section 44AD) के नियमों से कम दिखाते हैं, तो उन्हें सीए (CA) से टैक्स ऑडिट कराना पड़ता है।

यदि किसी F&O या इंट्राडे ट्रेडर के लिए टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य होता है, तो उनके लिए आईटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई नहीं, बल्कि 31 अक्टूबर होती है। वहीं, ऐसे ऑडिट योग्य खातों की ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा 30 सितंबर तय की गई है। इसके विपरीत, यदि किसी छोटे ट्रेडर का टर्नओवर सीमित है और उस पर टैक्स ऑडिट के नियम लागू नहीं होते हैं, तो उसके लिए भी ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहती है। हालांकि, ऑडिट न कराने वाले ट्रेडर्स के लिए भी सही समय पर सही आईटीआर फॉर्म चुनकर फाइल करना अनिवार्य है, वरना बाद में आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है।

आपके लिए क्या है लास्ट डेट?

ट्रेडर्स के लिए डेडलाइन और ऑडिट का सही समय पर ध्यान रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि F&O या इंट्राडे में हुए नुकसान (Trading Loss) को कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward) करने के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य शर्त है। अगर कोई ट्रेडर 31 जुलाई (गैर-ऑडिट मामलों में) या 31 अक्टूबर (ऑडिट मामलों में) तक अपना आईटीआर दाखिल नहीं करता है, तो वह चालू वित्त वर्ष के ट्रेडिंग लॉस को अगले वर्षों के मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, तय तारीख के बाद रिटर्न भरने पर लेट फीस और ब्याज का भुगतान भी करना पड़ता है। इसलिए, ट्रेडिंग करने वाले सभी निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) स्टेटमेंट और टर्नओवर का सही हिसाब लगाकर समय रहते सीए की मदद से अपना आईटीआर फाइल करें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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