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अडानी ग्रुप के शेयरों में 15% तक गिरावट, 1.4 लाख करोड़ स्वाह; अमेरिका से आई बुरी खबर

शुक्रवार को शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखने को मिली। Adani Green, Adani Enterprises, Adani Energy और Adani Ports समेत कई शेयर 15% तक टूट गए, जिससे ग्रुप की कुल मार्केट कैप में करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई और वैल्यूएशन घटकर लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये रह गया।

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बड़ी गिरावट

Photo : TN Innovations

अडानी ग्रुप के स्टॉक्स में तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका की रेगुलेटरी एजेंसी यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) से जुड़ा एक नया लीगल डेवलपमेंट रहा, जिसने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी। गिरावट की ट्रिगर पॉइंट US SEC की वह अर्जी रही, जिसमें उसने न्यूयॉर्क कोर्ट से अनुमति मांगी कि वह गौतम अडानी और सागर अडानी को समन सीधे ईमेल के जरिए भेज सके।

SEC के मुताबिक, पारंपरिक कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए समन सर्व करने में दिक्कतें आ रही थीं। एजेंसी का कहना है कि वह पिछले साल से समन भेजने की कोशिश कर रही है, लेकिन पहले भारतीय अथॉरिटीज के जरिए सर्विस से जुड़े प्रयास प्रोसीजरल ग्राउंड्स पर आगे नहीं बढ़ पाए। यह मामला इसलिए भी हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक बड़े भारतीय कॉरपोरेट ग्रुप के खिलाफ अमेरिका में रेगुलेटरी एक्शन की बात सामने आती है, जो ग्लोबल इन्वेस्टर्स की नजर में सीधे “कंप्लायंस और गवर्नेंस रिस्क” बढ़ाता है।

आरोप क्या हैं?

SEC से जुड़ी इस कार्रवाई का संबंध कथित तौर पर फ्रॉड और 26.5 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत योजना से जोड़ा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आरोप नवंबर 2024 में अनसील हुए एक मुकदमे से जुड़े हैं, जिसमें कहा गया कि अडानी ग्रुप के कुछ एग्जीक्यूटिव्स ने कथित तौर पर भारत में पावर परचेज एग्रीमेंट हासिल करने के लिए अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई। इसके अलावा शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की एंटी-करप्शन प्रैक्टिसेज को लेकर कथित तौर पर मिसलीडिंग डिस्क्लोजर दिए गए। यही पॉइंट निवेशकों के लिए ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि इससे सिर्फ शेयर प्राइस नहीं, बल्कि फंडिंग, वैल्यूएशन और रेगुलेटरी ट्रस्ट पर भी असर पड़ सकता है।

क्या है अडानी ग्रुप का जवाब?

इस पूरे मामले पर अडानी ग्रुप ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। ग्रुप का कहना है कि वह अपने बचाव में सभी उपलब्ध कानूनी विकल्प अपनाएगा। कंपनी की ओर से यह भी जोर दिया गया कि वह गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी के उच्च मानकों के लिए प्रतिबद्ध है। मार्केट की नजर अब इस बात पर है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है और कंपनी अपने पक्ष में कौन से तथ्य व दस्तावेज पेश करती है।

शेयरों में कितनी गिरावट आई?

बिकवाली का असर ग्रुप के बड़े काउंटरों पर साफ दिखा। Adani Green करीब 14% टूटकर 772 रुपये के आसपास आ गया। Adani Enterprises में करीब 11% की गिरावट दर्ज हुई और शेयर 1,862.8 रुपये तक फिसला। वहीं Adani Energy करीब 12% और Adani Ports करीब 7.5% टूटे। इसके अलावा ग्रुप की अन्य कंपनियों जैसे Ambuja Cement और ACC में भी कमजोरी दिखी, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक “ग्रुप-वाइड रिस्क” को प्राइस इन कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस तरह के मामलों में सबसे बड़ा डर यह रहता है कि लीगल और रेगुलेटरी प्रोसेस लंबा खिंच सकता है। ऐसे में शेयरों में वोलैटिलिटी बढ़ती है और निवेशक “वेट एंड वॉच” मोड में चले जाते हैं। यह मामला अडानी ग्रुप के लिए केवल एक दिन की गिरावट तक सीमित नहीं है, क्योंकि इससे जुड़े अपडेट्स आगे भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे क्या देखना होगा?

आगे बाजार की नजर SEC की कानूनी प्रक्रिया, कोर्ट के फैसले और कंपनी की प्रतिक्रिया पर रहेगी। अगर मामला लंबा चलता है तो अडानी स्टॉक्स में शॉर्ट टर्म में दबाव बना रह सकता है। वहीं अगर कंपनी समय पर स्पष्टता और मजबूत लीगल डिफेंस पेश करती है तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट सकता है। फिलहाल, निवेशकों के लिए यह एक हाई-इम्पैक्ट डेवलपमेंट है, क्योंकि एक ही सत्र में 1.4 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू मिटना बताता है कि बाजार इस खबर को कितनी गंभीरता से ले रहा है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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