उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सत्तारूढ़ दल पर दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर बेहद आक्रामक हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अपनी छवि चमकाने के नाम पर जनता के टैक्स का लगभग 7,000 करोड़ रुपया पानी की तरह बहा दिया है।
अखिलेश ने इसे सरकार का 'कॉस्मेटिक फेशियल' बताते हुए कहा कि जब राज्य का युवा बेरोजगारी, महंगाई, मंदी, एमएसपी और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याओं से संघर्ष कर रहा है, तब प्रचार पर इतना बड़ा बजट लुटाना अति-निंदनीय है। सपा प्रमुख ने दावा किया कि यदि इतनी बड़ी राशि से केजी से लेकर पीजी स्तर तक के शिक्षण संस्थान बनाए जाते, तो प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य संवर सकता था।
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शताब्दी वर्ष अब 'समाप्ति वर्ष' में बदल चुका-सपा मुखिया
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष और देश की 'जेन जी' (नई पीढ़ी) का जिक्र करते हुए विरोधी खेमे में अंदरूनी खींचतान का दावा किया। उन्होंने लिखा कि जनता के आक्रोश से घबराकर 'संगी-साथी' अब एक-दूसरे के खिलाफ ढाल बना रहे हैं। शीर्ष नेताओं के विचारों में विरोधाभास दिख रहा है और यह समझ आ चुका है कि पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी को अब सत्ता की सीढ़ी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष अब 'समाप्ति वर्ष' में बदल चुका है और 15 अगस्त से भाजपा की नकारात्मक राजनीति से आजादी दिलाने के लिए एक नया आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भाजपा का पलटवार
दूसरी तरफ, भाजपा ने अखिलेश यादव के इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा विधायक विजय बहादुर पाठक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य का सूचना विभाग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन जारी करता है। इसमें मुख्यमंत्री की तस्वीर होना स्वाभाविक और पुरानी परंपरा है, ताकि आम नागरिक अपने अधिकारों और योजनाओं के प्रति जागरूक हो सकें। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि सपा प्रमुख को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल के रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए।
