ईरान की मुद्रा रियाल मंगलवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। तेहरान में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 25 लाख रियाल से अधिक की दर पर कारोबार किया। यह गिरावट दो सितंबर को दर्ज पिछले रिकॉर्ड 22 लाख रियाल प्रति डॉलर के स्तर के केवल 27 दिन बाद हुई है। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी मुद्रा की विनिमय दर में लगतार गिरावट आ रही है।
अमेरिकी प्रतिबंधों से रियाल में गिरावट
रियाल में यह तेज गिरावट ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका की ओर से 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से आर्थिक रूप से और अलग-थलग करना है। ईरानी अर्थव्यवस्था में कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच करेंसी पर दबाव और बढ़ गया है। Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की सालाना महंगाई दर 61.4% तक पहुंच गई है, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार खाद्य पदार्थों की कीमतों में सालाना आधार पर 128.1% की बढ़ोतरी हुई है।
महंगाई बढ़ने से करेंसी पर बढ़ा दबाब
ऊंची महंगाई, खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और कड़े होते अमेरिकी प्रतिबंधों ने रियाल पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे ईरानी उपभोक्ताओं की खरीदारी की क्षमता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। फ्री मार्केट में रियाल की यह ताजा गिरावट ईरान की करेंसी पर बढ़ते दबाव को दिखाती है। देश पहले से ही गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक उसकी पहुंच पर भी कई तरह की पाबंदियां हैं।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची करेंसी दर यह भी बताती है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव कितना बढ़ गया है। ऊंची महंगाई और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों के बीच तेहरान के लिए आर्थिक स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। अगर अमेरिका से जारी युद्ध का हल नहीं निकला तो आने वाले दिनों में और बड़ी गिरावट आ सकती है।
