हर कोई चाहता है कि उसका पैसा तेजी से बढ़े और वह जल्द से जल्द अमीर बन जाए। इस चाहत में लोग अक्सर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य जगहों पर पैसा तो लगा देते हैं, लेकिन उनके मन में रिटर्न को लेकर बहुत अजीब और अवास्तविक (Unrealistic) उम्मीदें होती हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि उनका पैसा रातों-रात दोगुना हो जाएगा, और जब ऐसा नहीं होता, तो वे निराश होकर निवेश करना ही बंद कर देते हैं। निवेश की दुनिया के दिग्गजों का कहना है कि वेल्थ क्रिएशन (संपत्ति बनाने) का असली राज भारी-भरकम रिटर्न की उम्मीद करना नहीं, बल्कि बाजार की हकीकत को समझना है। इसी हकीकत को बहुत ही आसान तरीके से समझाने के लिए एक्सपर्ट्स निवेश का एक खास नियम बताते हैं, जिसे '10-5-3 का नियम' (10-5-3 Rule of Investing) कहा जाता है। यह फॉर्मूला निवेशकों को यह समझने में मदद करता है कि उन्हें किस एसेट क्लास से कितने रिटर्न की सही उम्मीद रखनी चाहिए।
क्या है 10-5-3 का नियम?
इस फॉर्मूले में सबसे पहला अंक है '10'। यह 10 दर्शाता है कि जब आप लंबी अवधि (Long Term) के लिए इक्विटी यानी शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपको औसतन 10% के सालाना रिटर्न की उम्मीद रखनी चाहिए। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ समय में इससे कहीं ज्यादा रिटर्न दिया है, लेकिन लंबे समय की प्लानिंग करते समय 10% का रिटर्न मानकर चलना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा होता है। यह आपको बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी मानसिक रूप से शांत रखता है और आप किसी शॉर्ट-कट के चक्कर में फंसने से बच जाते हैं।
इस फॉर्मूले का दूसरा अंक है '5'। यह 5 फिक्स्ड इनकम वाले सुरक्षित निवेश विकल्पों को दर्शाता है, जैसे कि बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या डेट फंड। यह नियम कहता है कि आपको अपनी एफडी या सुरक्षित सरकारी योजनाओं से औसतन 5% के सालाना रिटर्न की उम्मीद रखनी चाहिए। भले ही मौजूदा समय में कुछ बैंक इससे थोड़ा ज्यादा ब्याज दे रहे हों, लेकिन जब हम महंगाई (Inflation) और टैक्स को काट देते हैं, तो हाथ में आने वाला वास्तविक रिटर्न लगभग इसी के आसपास बैठता है। यह हिस्सा आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है ताकि जरूरत के समय आपके पास सुरक्षित पैसा मौजूद रहे।
फॉर्मूले का आखिरी अंक है '3'। यह 3 आपके रेगुलर सेविंग्स अकाउंट (बचत खाते) में पड़े पैसे पर मिलने वाले ब्याज को दर्शाता है। आमतौर पर भारत के अधिकांश बड़े बैंक सेविंग्स अकाउंट पर 3% के आसपास ही सालाना ब्याज देते हैं। यह नियम आपको याद दिलाता है कि सेविंग्स अकाउंट में जरूरत से ज्यादा पैसा रखना घाटे का सौदा है, क्योंकि यहाँ पड़ा पैसा महंगाई की दर को भी मात नहीं दे पाता। सेविंग्स अकाउंट का इस्तेमाल सिर्फ उतने ही पैसों के लिए होना चाहिए, जिनकी जरूरत आपको अगले कुछ दिनों या महीनों में पड़ने वाली है।
इस नियम का असली फायदा क्या है?
10-5-3 का नियम कोई जादू की छड़ी नहीं है जो आपको रातों-रात अमीर बना दे, बल्कि यह एक बेहतरीन 'एसेट एलोकेशन' (Asset Allocation) टूल है। जब आपको पता होता है कि इक्विटी से 10%, एफडी से 5% और सेविंग्स से 3% का ही रियलिस्टिक रिटर्न मिलना है, तो आप अपने रिस्क और जरूरतों के हिसाब से पैसों का सही बंटवारा कर पाते हैं। यह फॉर्मूला आपको लालच में आकर गलत जगह बड़ा रिस्क लेने से बचाता है और एक मजबूत, संतुलित पोर्टफोलियो बनाने में मदद करता है, जिससे आप बिना किसी तनाव के लंबी अवधि में बड़ी वेल्थ क्रिएट कर सकते हैं।
