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TVS ने बढ़ाई iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत, क्या यूं वसूली जाएगी चार्जर की कीमत?

  • Authored by: अंशुमन साकल्ले
  • Updated May 10, 2023, 06:44 PM IST

TVS Motor Company ने iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत में इजाफा कर दिया है और ईवी के दाम 9,000 रुपये बढ़ा दिए हैं। हाल में सरकार ने कंपनी पर बड़ा जुर्माना लगाते हुए ग्राहकों को चार्जर की रकम लौटाने को कहा है।

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शुरुआती एक्सशोरूम कीमत 1.66 लाख रुपये कर दी गई है जो टॉप मॉडल के लिए 1.68 लाख रुपये तक जाती है।

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • टीवीएस आईक्यूबी की कीमत बढ़ी
  • कीमत में हुआ 9,000 रुपये इजाफ
  • हाल में कंपनी पर हुआ बड़ा जुर्माना

TVS iQube Price Hike: टीवीएस आईक्यूब इलेक्ट्रिक स्कूटर भारत में तेजी से पसंद किया जा रहा है और अब कंपनी ने इसकी कीमत में बदलाव किया है। अब नई आईक्यूब ईवी की अपडेटेड प्राइस लिस्ट कंपनी की वेबसाइट पर दिखने लगी है। शुरुआती एक्सशोरूम कीमत 1.66 लाख रुपये कर दी गई है जो टॉप मॉडल के लिए 1.68 लाख रुपये तक जाती है। ये बेंगलुरु की एक्सशोरूम कीमत है जो फेम-2 सब्सिडी के बिना है। कुल मिलाकर कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत में 9,000 रुपये का इजाफा कर दिया है।

सब्सिडी के बाद कितनी होगी कीमत?

टीवीएस आईक्यूब के स्टैंडर्ड वेरिएंट की बात करें तो इसमें फोम-2 सब्सिडी लगने के बाद ऑनरोड कीमत 51,000 रुपये कम हो जाती है, ऐसे में ग्राहक को 1.21 लाख रुपये अदा करने होते हैं। टॉप मॉडल की बेंगलुरु में ऑनरोड कीमत 1.32 लाख रुपये हो जाती है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने हाल में ईवी कंपनियों पर सख्त एक्शन लिया है जिसके बाद ग्राहकों को अब 650 वाट चार्जर स्कूटर के साथ में उपलब्ध कराया जाएगा।

क्या है सब्सिडी में हेरफेर का मामला?

भारत की चार बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता ओला, एथर, टीवीएस और वीडा पर फेम-2 सब्सिडी पाने के लिए नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। सरकार ने दोषी पाते हुए जहां हीरो इलेक्ट्रिक और ओकिनावा पर करीब 250 करोड़ का जुर्माना ठोका है, वहीं अब ये चार कंपनियां अपने ग्राहकों को इलेक्ट्रिक चार्जर के लिए वसूली गई रकम वापस करने वाली हैं। इन कंपनियों ने इलेक्ट्रिक स्कूटर की खरीद पर ग्राहकों को अलग से इलेक्ट्रिक चार्जर बेचे थे, अब ये रकम इन्हें वापस की जाएगी।

क्या है सब्सिडी में हेरफेर का मामला?

भारत सरकार की फेम-2 ईवी स्कीम में सब्सिडी पाने के लिए हेरफेर की कई शिकायतों के बाद मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज ने इसकी जांच की है। इस मामले की जांच करने के लिए आईकैट जैसी इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को नियुक्त किया गया था। इस मामले की जांच करते हुए इन एजेंसियों ने पहले से बिक चुकीं और बनाई जा रही ईवी पर मिली सब्सिडी क्लेम पर इन्वेस्टिगेशन की। इन इलेक्ट्रिक वाहनों को खोलकर देखा गया और जिससे ये पता लगाया जा सके कि इनमें कितने पुर्जे देशी और कितने विदेशी हैं।

250 करोड़ का जुर्माना लगाया

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को लेकर ये जांच पूरी हो चुकी है जिसमें हीरो इलेक्ट्रिक और ओकिनावा सब्सिडी पाने के लिए हेरफेर करने में शामिल पाई गई हैं। इन दोनों कंपनियों ने फेम-2 स्कीम के तहत सब्सिडी पाने के लिए विदेशी पुर्जों का इस्तेमाल अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में किया है और उन्हें देशी बताया है। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने इन दोनों ईवी निर्माताओं से करीब 250 करोड़ रुपये की रिकवरी मांगी है। इनमें से ओकिनावा ऑटोटेक पर 116 करोड़ का रिकवरी नोटिस जारी हुआ है, वहीं हीरो इलेक्ट्रिक को 133 करोड़ रुपये वापस करने को कहा गया है।

ओला ने माल ली अपनी गलती

रिपोर्ट में सामने आया है कि ओला इलेक्ट्रिक भी सब्सिडी पाने की इस हेरफेर में शामिल है, हालांकि कंपनी ने अपनी गलती मान ली है। ये कंपनी नियमों का उल्लंघन करने के चलते अब 130 करोड़ रुपये लौटाने का तैयार हो गई है, ओला ने 2020 से 20 मार्च 2023 तक ग्राहकों को ऑफबोर्ड चार्जर ग्राहकों को बेचे थे जो विदेशी थे और इन्हें लोकल पुर्जे बताकर बेचा गया था। इन तीनों के अलावा ओकाया, टीवीएस, जितेंद्र न्यू ईवी, एवन साइकिल, विक्ट्री और ठकराल को इस जांच में क्लीन चिट दी गई है।

अंशुमन साकल्ले
अंशुमन साकल्लेauthor

अंशुमन साकल्ले जून 2022 से टाइम्स नाउ नवभारत (www.timesnowhindi.com/) में बतौर सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं। ये ईएमएमसी, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और जी न्यूज डिजिटल में काम करने के बाद संस्थान से जुड़े। इन्हें सभी मुख्य बीट्स पर काम करने का अनुभव है और ये 12 वर्ष से भी ज्यादा इसी पेशे में गुजार चुके हैं। एक्सपर्टीज की बात करें तो ऑटो और टेक से जुड़ी तमाम खबरों का जिम्मा यही संभाल रहे हैं। ऑन ग्राउंड रिपोर्ट हो या वीडियो या फिर गाड़ियों का रिव्यू, ये हमेशा अलग-अलग एंगल से खबरों को रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। भोपाल के रहने वाले अंशुमन बड़े घुमक्कड़ हैं और ये देश की लगभग सभी प्रचलित जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर चुके हैं। एनडीटीवी से लेकर अब तक इन्होंने सिर्फ ऑटोमोबाइल जगत से जुड़ी खबरों पर ही काम किया है, हालांकि कोर बीट से इतर चुनाव, बजट या किसी भी बडे इवेंट पर इन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इन सबके अलावा राजनीति में भी इन्हें खासी दिलचस्पी है, यही वजह है कि मध्यप्रदेश की पॉलिटिक्स को ये बहुत गहराई से जानते हैं।

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