नई कार खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है। अक्सर लोग कार की कीमत और मासिक EMI पर ही सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन कार खरीदने के बाद कई ऐसे खर्च सामने आते हैं जिनके बारे में पहले से जानकारी नहीं होती। यही कारण है कि कई बार बजट से अधिक खर्च होने लगता है और नई कार का सुकून आर्थिक दबाव में बदल जाता है। अगर आप भी नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल EMI ही नहीं बल्कि कुछ हिडन चार्जेस ( hidden car charges) को भी समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कौन-से हिडन चार्ज आपकी जेब का बोझ बढ़ा सकते हैं-
इंश्योरेंस का खर्च
कार खरीदते समय थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होता है, लेकिन अधिकांश ग्राहक कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस भी लेते हैं। पहले साल का इंश्योरेंस अक्सर कार की कीमत में शामिल दिखता है, लेकिन अगले वर्षों में इसे रिन्यू करवाना पड़ता है। वाहन की कीमत और मॉडल के आधार पर यह खर्च हजारों रुपये तक हो सकता है।
रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स
कार की एक्स-शोरूम कीमत के अलावा आरटीओ रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स भी देना पड़ता है। कई राज्यों में यह राशि कार की कीमत का बड़ा हिस्सा हो सकती है। नई कार खरीदते समय यह एकमुश्त खर्च होता है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
एक्सेसरीज पर अतिरिक्त खर्च
नई कार लेने के बाद लोग सीट कवर, फ्लोर मैट, डैश कैम, इंफोटेनमेंट एक्सेसरीज, बॉडी कवर और अन्य सामान लगवाते हैं। ये खर्च शुरुआत में छोटे लगते हैं, लेकिन कुल मिलाकर हजारों या कभी-कभी लाख रुपये तक पहुंच सकते हैं।
सर्विस और मेंटेनेंस
कई लोगों को लगता है कि नई कार में कई साल तक कोई खर्च नहीं होगा, लेकिन नियमित सर्विसिंग, इंजन ऑयल बदलना, फिल्टर बदलना और अन्य रखरखाव कार्य जरूरी होते हैं। समय पर सर्विस न कराने पर बाद में बड़ा खर्च भी आ सकता है।
ईंधन का खर्च
कार खरीदने के बाद सबसे नियमित खर्च ईंधन का होता है। अगर आपकी रोजाना ड्राइविंग ज्यादा है, तो पेट्रोल या डीजल पर हर महीने अच्छा-खासा खर्च हो सकता है। इसलिए कार खरीदते समय केवल कीमत नहीं बल्कि उसकी माइलेज पर भी ध्यान देना चाहिए।
पार्किंग शुल्क
शहरों में रहने वाले लोगों के लिए पार्किंग भी एक बड़ा खर्च बन सकती है। कई आवासीय सोसाइटियां और व्यावसायिक क्षेत्र पार्किंग शुल्क लेते हैं। अगर आपके पास निजी पार्किंग नहीं है, तो यह खर्च हर महीने बढ़ सकता है।
फास्टैग और टोल चार्ज
हाईवे पर नियमित यात्रा करने वालों के लिए टोल टैक्स एक अतिरिक्त खर्च है। FASTag के जरिए भुगतान आसान हो गया है, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले लोगों को हर महीने टोल पर अच्छी-खासी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
टायर और बैटरी बदलने का खर्च
कुछ वर्षों के इस्तेमाल के बाद टायर और बैटरी बदलना जरूरी हो जाता है। मॉडल के अनुसार यह खर्च कई हजार से लेकर दसियों हजार रुपये तक हो सकता है। यह खर्च अचानक सामने आता है, इसलिए इसके लिए पहले से तैयारी रखना बेहतर होता है।
लोन प्रोसेसिंग और दूसरे बैंक शुल्क
अगर कार लोन पर खरीदी गई है तो केवल EMI ही नहीं बल्कि प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज शुल्क और कुछ मामलों में फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज भी देना पड़ सकता है। इसलिए लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
