Old car sale
यदि आप भी अपनी पुरानी कार बेच रहे हैं तो आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना होगा, नहीं तो आप बुरे फंस सकते हैं, क्योंकि आप ये नहीं जानते कि आपने जो गाड़ी बेची है, उसका इस्तेमाल किसी आतंकी घटना में होने वाला है या फिर कोई उसे इस्तेमाल करेगा। हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट में इसी तरह की बात सामने आई है। आइए जानते हैं कि पुरानी कार बेचते समय किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए।
पुरानी कार के खरीदार और विक्रेता दोनों को मिलकर नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके लिए दोनों को आवश्यक फॉर्म भरकर जमा करने होते हैं। विक्रेता को कार के मूल दस्तावेज जमा करने होते हैं जिनमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), इंश्योरेंस पेपर, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC), पहचान और पते का प्रमाण आदि शामिल होते हैं। वहीं, खरीदार को अपनी आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ देना होता है। दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद RTO नए मालिक के नाम पर नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जारी करता है। आइए कार ओनरशिप ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया 5 आसान स्टेप्स में समझते हैं।
सबसे पहले RTO या परिवहन (Parivahan) वेबसाइट से फॉर्म 29 और फॉर्म 30 डाउनलोड करें और भरें। अगर कार को किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा रहा है, तो नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) या फॉर्म 28 की जरूरत होगी। अगर कार लोन पर खरीदी गई थी, तो संबंधित बैंक से NOC और फॉर्म 35 लेना होगा ताकि यह साबित हो सके कि लोन चुका दिया गया है।
खरीदार और विक्रेता दोनों को निम्न दस्तावेज तैयार रखने चाहिए
सभी फॉर्म और दस्तावेज़ खरीदार के नए RTO में जमा करें। यह प्रक्रिया आप ऑनलाइन परिवहन पोर्टल के माध्यम से या RTO ऑफिस जाकर पूरी कर सकते हैं, हालांकि फॉर्म पर हस्ताक्षर किए हुए हार्ड कॉपी दस्तावेजों को RTO में जमा करना अनिवार्य है।
खरीदार को संबंधित RTO में ट्रांसफर फीस जमा करनी होती है। साथ ही, वाहन पर बकाया टैक्स या चालान का भुगतान करना भी जरूरी है, ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
जब RTO दोनों पक्षों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन कर लेता है, तो वह कार की ओनरशिप ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी कर खरीदार के नाम पर नया RC कार्ड जारी कर देता है।
कार बेचने और स्वामित्व हस्तांतरण को सही और कानूनी तरीके से पूरा करने के लिए ये कदम उठाएं।
वास्तविक स्थिति यह है कि जमीनी स्तर पर अधिकतर लोगों को स्वामित्व ट्रांसफर में देरी होती है। डीलर या खरीदार कई बार ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी करते हैं, खासकर अगर कार किसी बिचौलिए के जरिए बेची गई हो। इसके अलावा सेकेंड-हैंड डीलर तब तक पेपरवर्क नहीं करते जब तक नई बिक्री न हो जाए, या कभी-कभी इसे नजरअंदाज भी कर देते हैं।
कई बार बिक्री केवल साधारण कागज पर होती है, जो कानूनी रूप से खतरनाक है। पुराने मालिक के नाम से अभी भी SMS अलर्ट या ई-चालान नोटिस आते रहते हैं, क्योंकि RC अपडेट नहीं हुई होती। अगर नया मालिक किसी ट्रैफिक अपराध या दुर्घटना में शामिल होता है, तो शुरुआत में जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आती है क्योंकि RC पर उसका नाम रहता है। जब तक ट्रांसफर पूरा नहीं होता, तब तक रोड टैक्स, पार्किंग टैक्स या बीमा दायित्व पुराने मालिक के नाम से जुड़े रहते हैं।