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महंगी होंगी नई कारें और बाइक खरीदना! सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का होगा असर

भारतीय सड़कों पर चलने वाली लगभग 56% गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के हैं। SC की बेंच ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार से लेकर इरदा को इस मामले से गंभीरता से लेते हुए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

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नई कार और बाइक

अगर आप नई कार या बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। आने वाले दिनों में नई कार और बाइक खरीदने के लिए आपको अधिक पैसे खर्च पड़ सकते हैं। दरअसल यह सुप्रीम कोर्ट के इंश्योरेंस को लेकर सख्त रुख के कारण होगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) को नए वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटर से मोटर इंश्योरेंस का एक आसान चार-लेयर वाला स्ट्रक्चर लाने को भी कहा है, ताकि खरीदारों को बंडल पॉलिसी बेचने के बजाय अपनी पसंद के कवरेज के बारे में साफ विकल्प मिल सकें।

लंबी अवधि का अनिवार्य इंश्योरेंस

  • नए निर्देशों के तहत, नई कारों को अब चार साल के अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के साथ बेचना होगा, जबकि अभी यह अवधि तीन साल है।
  • नई दोपहिया गाड़ियों के लिए, अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि मौजूदा पांच साल से बढ़कर छह साल हो जाएगी।
  • चूंकि खरीदारों को गाड़ी खरीदते समय ही लंबी अवधि के इंश्योरेंस का भुगतान करना होगा, इसलिए नई गाड़ी खरीदने की शुरुआती लागत बढ़ जाएगी।

इंश्योरेंस के आसान विकल्प

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में चार हिस्से होने चाहिए:

  • अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस (कानून के तहत जरूरी और दूसरों को हुए नुकसान को कवर करता है)
  • यात्रियों या पीछे बैठने वालों (पिलियन राइडर्स) के लिए वैकल्पिक कवर
  • मालिक, ड्राइवर और यात्रियों के लिए वैकल्पिक पर्सनल एक्सीडेंट कवर
  • वैकल्पिक 'ओन-डैमेज' कवर, जो इंश्योरेंस वाली गाड़ी को दुर्घटनाओं और अन्य नुकसान से बचाता है

ग्राहकों की सुविधा के लिए, कोर्ट ने IRDAI को एक स्टैंडर्ड "कस्टमर ऑप्शन फॉर्म" लाने का निर्देश दिया है। इस फॉर्म में उपलब्ध कवर के बारे में साफ जानकारी होगी और खरीदार अपनी जरूरत के हिसाब से सुरक्षा चुन सकेंगे, चाहे वे इंश्योरेंस ऑनलाइन खरीदें या ऑफलाइन।

रेगुलेटर से यह भी कहा गया है कि वह इंश्योरेंस कंपनियों के साथ मिलकर ऑप्शनल कवर के लिए स्टैंडर्ड पॉलिसी शर्तें तैयार करे, साथ ही कंपनियों को कीमत और प्रोडक्ट की खूबियों के आधार पर एक-दूसरे से मुकाबला करने की छूट भी दे।

बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों पर सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि नई गाड़ियों के लिए लंबे समय का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य करने के अपने पिछले आदेश के बावजूद, भारतीय सड़कों पर अभी भी कई गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं।

नियमों का पालन बेहतर बनाने के लिए, कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और IRDAI को निर्देश दिया कि वे बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें।

नई व्यवस्था के तहत, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो डेटाबेस और VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इससे अधिकारी बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों का अपने-आप पता लगा सकेंगे और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ई-चालान जारी कर सकेंगे।

कोर्ट ने कहा कि इन बदलावों का मकसद इंश्योरेंस कवरेज बढ़ाना, ग्राहकों के लिए पारदर्शिता लाना और सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करना है।

सुप्रीम कोर्ट के पायलट प्रोजेक्ट का सुझाव

इरदा को निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और IRDAI को निर्देश दिया है कि बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने के नियम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए।

ANPR कैमरों से निगरानी: सड़कों और पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे, जो सीधे 'वाहन' (VAHAN) और इंश्योरेंस डेटाबेस से कनेक्ट होकर बिना बीमा वाली गाड़ियों को तुरंत पहचान लेंगे।

डिजिटल चालान और रोक: बिना वैलिड इंश्योरेंस पकड़े जाने पर तुरंत डिजिटल चालान जारी होगा और संबंधित गाड़ी में ईंधन भरने पर रोक लगाई जा सकेगी।

मुआवजे की सुरक्षा: इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के शिकार पीड़ितों को थर्ड-पार्टी क्लेम/मुआवजा मिलने की गारंटी सुनिश्चित करना है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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