सितंबर का महीना शुरू हो चुका है और इस समय बहुत से लोग नई कार खरीदने का प्लान बना रहे होंगे। कार खरीदते समय ज्यादातर लोग सबसे पहले इसकी कीमत, डाउन पेमेंट और हर महीने जाने वाली EMI का हिसाब लगाते हैं। लेकिन कार खरीदने के बाद सिर्फ EMI ही खर्च नहीं होती। इसके अलावा भी कई ऐसे खर्च होते हैं, जो हर महीने या समय-समय पर आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं। अगर इन खर्चों को पहले से बजट में शामिल नहीं किया गया तो कार खरीदने के बाद आपका मासिक खर्च अनुमान से काफी ज्यादा हो सकता है। आइए जानते हैं कार खरीदारी को लेकर और कौन-से खर्च ध्यान में रखे जाने चाहिए
कार का इंश्योरेंस
कार खरीदते समय इंश्योरेंस एक जरूरी खर्च है। पहली बार कार खरीदने वाले कई लोग सिर्फ ऑन-रोड कीमत और EMI पर ध्यान देते हैं, जबकि इंश्योरेंस का खर्च भी कुल बजट का हिस्सा होता है।
फ्यूल का खर्च
कार खरीदने के बाद सबसे नियमित खर्चों में से एक फ्यूल खर्च का है। पेट्रोल या डीजल कार लेने पर हर महीने आपकी ड्राइविंग के हिसाब से फ्यूल का खर्च बढ़ेगा।
सर्विस और मेनटेनेंस
नई कार होने का मतलब यह नहीं है कि शुरुआती वर्षों में कोई मेंटेनेंस खर्च नहीं होगा। कार की नियमित सर्विस, इंजन ऑयल, फिल्टर और दूसरे जरूरी मेंटेनेंस पर समय-समय पर पैसा खर्च होता है।
पार्किंग का खर्च
अगर आपके घर में कार पार्क करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है तो पार्किंग भी एक नियमित खर्च बन सकती है। कुछ जगहों पर घर के अलावा ऑफिस या अन्य स्थान पर भी पार्किंग के लिए पैसे देने पड़ सकते हैं।
Toll और FASTag खर्च
अगर आप हाईवे या एक्सप्रेसवे से नियमित सफर करते हैं तो टोल का खर्च भी ध्यान में रखना चाहिए। हर यात्रा में टोल देना पड़ सकता है और महीने में कई बार लंबी दूरी तय करने वालों के लिए यह रकम बढ़ सकती है।
टायर और बैटरी जैसे खर्च
कार के टायर हमेशा के लिए नहीं चलते। कुछ समय बाद टायर बदलने पड़ सकते हैं। इसी तरह कार की बैटरी भी एक समय के बाद बदलनी पड़ सकती है।
क्लीनिंग और कार केयर
कार खरीदने के बाद उसे साफ-सुथरा रखने का खर्च भी जुड़ जाता है। अगर आप नियमित रूप से कार की सफाई करवाते हैं तो हर महीने या हर कुछ दिनों में पैसे खर्च हो सकते हैं।
इसके अलावा समय-समय पर कार की डीप क्लीनिंग, पॉलिशिंग या दूसरी कार केयर सर्विस पर भी खर्च किया जा सकता है। ये जरूरी खर्च नहीं हैं, लेकिन कार के मालिक बनने के बाद बजट में शामिल हो सकते हैं।
