SIAM, ACMA:भारतीय मोटर वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2023-24 में 20 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया और अब देश में संग्रहित कुल जीएसटी में इसका योगदान 14-15 प्रतिशत है।‘सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने यह बात कही है। मोटर वाहन क्षेत्र देश में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस समय भारतीय वाहन उद्योग तीसरा सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार है। वहीं सबसे बड़ा दोपहिया तथा तिपहिया बाजार और तीसरा सबसे बड़ा वाणिज्यिक वाहन बाजार हैं।
आयात पर निर्भरता हो रही है कम
SIAM के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने कहा है कि भारतीय मोटर वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2023-24 में 20 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया...हम देश में एकत्र कुल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में करीब 14-15 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं।उन्होंने कहा कि मोटर वाहन उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.8 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से अधिक योगदान देगा।
अग्रवाल के अनुसार 2019-20 के आधार स्तर से 2025 तक आयात सामग्री को 60 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें पांच वर्षों में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक की कमी का लक्ष्य रखा गया है। हमने पहले दो वर्षों में आयात में 5.8 प्रतिशत की कमी के पहले चरण को बेहतरीन तरह से हासिल किया है।
वाहन उद्योग संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि हम तीसरा सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार, सबसे बड़ा दोपहिया तथा तिपहिया बाजार और तीसरा सबसे बड़ा वाणिज्यिक वाहन बाजार बन गए हैं। वह भी ऐसे समय में, जब देश 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की ओर अग्रसर है।
कौशल विकास अहम
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन(एसीएमए) की अध्यक्ष श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा कि उद्योग मोटर वाहन मिशन योजना के तीसरे संस्करण की प्रतीक्षा कर रहा है।उन्होंने कहा कि उद्योग को विशेष रूप से कौशल अंतर को दूर करने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मारवाह ने कहा, कि इसलिए, शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग और कौशल विकास में निवेश आवश्यक है। इसके अलावा, उद्योग सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर चिप की बढ़ती मांग रणनीतिक गठबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
