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टचस्क्रीन बन रही ड्राइवर के लिए जानलेवा! तो क्या अब टच से नहीं, बटन से चलेंगी भविष्य की कारें

कार के डैशबोर्ड पर स्मार्टफोन जैसी बड़ी और चमकदार टचस्क्रीन आजकल स्टेटस सिंबल बन चुकी हैं, लेकिन क्या यही 'स्टाइल' कार चालक की जान के लिए खतरा बना सकता है? रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में कारों में फिजिकल बटनों (Physical Buttons) को फिर से अनिवार्य करने का प्रस्ताव पेश किया गया है।

Are Car Touchscreens Dangerous

क्या सुरक्षा के लिए फिर लौटेंगे फिजिकल बटन (Photo: iStock)

चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक नए नियम का प्रस्ताव रखा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नए नियम के तहत वाहन के जरूरी सेफ्टी फंक्शन (Safety Functions) को फिजिकल स्विच या बटन से कंट्रोल करना अनिवार्य होगा। सवाल यह कि जहां एक ओर मॉडर्न गाड़ियों के डैशबोर्ड पर बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन लगाना ट्रेंड बन गया है, वहां चीन की ओर से इस तरह के नियमों को क्यों पेश किया जा रहा है? क्या गाड़ियों के डैशबोर्ड पर टचस्क्रीन की जगह एक बार फिर फिजिकल बटन का दौर लौट आएगा?

स्क्रीन से बढ़ता ध्यान भंग

सबसे पहले यही समझते हैं कि के डैशबोर्ड पर बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन लगाने की जगह फिजिकल बटन को क्यों प्राथमिकता दी जा रही है। दरअसल, सुरक्षित ड्राइविंग के लिए ड्राइवर की आंखों को सड़क पर टिके रहना जरूरी माना जाता है। ऐसे में जरूरी फंक्शन के लिए टचस्क्रीन का इस्तेमाल करते समय ड्राइवर की आंखें सड़क से औसतन 2 से 4 सेकंड तक हट जाती हैं। हाईवे की स्पीड पर यह दूरी दर्जनों मीटर की हो सकती है। टचस्क्रीन से अलग, फिजिकल बटन को बिना देखे दबाया जा सकता है। जबकि टचस्क्रीन पर सही आइकन खोजने के लिए देखना पड़ता है। यही माइक्रो-डिस्ट्रैक्शन दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाता है।

इमरजेंसी में प्रतिक्रिया समय

एक और कम ज्ञात तथ्य यह है कि ठंड, पसीना या दस्ताने पहनने की स्थिति में टचस्क्रीन का रिस्पॉन्स प्रभावित हो सकता है। अगर डी-फॉगर, हैजर्ड लाइट या एसी कंट्रोल जैसे जरूरी फंक्शन भी स्क्रीन में छिपे हों तो इमरजेंसी में प्रतिक्रिया समय बढ़ जाता है। यही कारण है क्रिटिकल फंक्शन्स के लिए फिजिकल बटन अनिवार्य करने की बात चल रही है।

क्या फिजिकल बटनों की वापसी होगी?

अब ग्राहकों के जेहन में यह भी सवाल होगा कि सुरक्षा की दृष्टि से ही सही पर क्या फिजिकल बटनों की वापसी होने जा रही है। इसका जवाब यह है कि पूरी तरह से पुराने स्टाइल में वापसी की संभावना कम है, लेकिन हाइब्रिड मॉडल यानी स्क्रीन + जरूरी फिजिकल बटन का चलन बढ़ सकता है। यूरोप में भी Euro NCAP ने संकेत दिया है कि भविष्य की सेफ्टी रेटिंग में जरूरी कंट्रोल्स के लिए फिजिकल बटन को महत्व दिया जा सकता है। इसका असर वैश्विक ऑटो कंपनियों पर पड़ता नजर आएगा।

फिजिकल बटन ज्यादा भरोसेमंद

कम लोग जानते हैं कि बड़ी स्क्रीन का मतलब ज्यादा सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन भी है। अगर सिस्टम हैंग हो जाए या अपडेट के दौरान गड़बड़ी हो, तो कई कंट्रोल एक साथ प्रभावित हो सकते हैं। फिजिकल बटन आमतौर पर अलग सर्किट पर काम करते हैं, इसलिए वे ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं।

शिवानी कोटनाला
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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