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10 हजार की 1 SIP या ₹5000-5000 की 2? 2 करोड़ का फंड बनाने के लिए कौन सा तरीका बेहतर?

₹2 करोड़ का बड़ा कॉर्पस बनाने के लिए क्या 10 हजार की एक ही SIP बेहतर है या 5-5 हजार की दो? जानिए पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन और सही एसेट एलोकेशन का गणित ताकि आपका फाइनेंशियल लक्ष्य आसानी से हासिल हो सके।

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2 करोड़ का फंड बनाने के लिए कौन सा तरीका बेहतर?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए संपत्ति बनाना आज के समय में हर छोटे-बड़े निवेशक का सपना बन चुका है। जब लक्ष्य ₹2 करोड़ जैसे बड़े कॉर्पस को हासिल करने का हो, तो अक्सर निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि 10,000 रुपये प्रति माह की एक ही एसआईपी में पैसा लगाया जाए या फिर ₹5,000-₹5,000 की दो अलग-अलग एसआईपी की शुरुआत की जाए। गणितीय रूप से देखें तो अगर दोनों स्थितियों में मिलने वाला औसत वार्षिक रिटर्न (जैसे 12% से 15%) समान रहता है, तो आपकी कुल जमा राशि और अंतिम फंड में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, व्यावहारिक और रणनीतिक रूप से दोनों तरीकों के अपने अलग-अलग फायदे और नुकसान हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

10 हजार की एक SIP

अगर आप ₹10,000 की एक ही एसआईपी चुनते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके पोर्टफोलियो का प्रबंधन बेहद आसान हो जाता है। आपको केवल एक फंड के प्रदर्शन पर नजर रखनी होती है, जिससे ओवरलैपिंग (एक ही कंपनी में बार-बार पैसा लगना) की संभावना खत्म हो जाती है और कागजी कार्रवाई कम होती है। हालांकि, इसमें जोखिम यह रहता है कि अगर वह अकेला फंड किसी वजह से लंबे समय तक अंडरपरफॉर्म (खराब प्रदर्शन) करता है, तो आपका ₹2 करोड़ का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। यह तरीका उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो किसी एक मजबूत लार्जकैप, फ्लेक्सीकैप या इंडेक्स फंड में बिना किसी उलझन के लंबा निवेश बनाए रखना चाहते हैं।

5-5 हजार की 2 SIP?

दूसरी तरफ, ₹5,000-₹5,000 की दो अलग-अलग एसआईपी शुरू करना आपको बेहतर पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन (Portfolio Diversification) का मौका देता है। इस रणनीति के तहत आप एक ₹5,000 की एसआईपी किसी स्टेबल फ्लेक्सीकैप फंड में और दूसरी ₹5,000 की एसआईपी थोड़े अधिक ग्रोथ वाले मिडकैप या स्मॉलकैप फंड में लगा सकते हैं। इससे आपके निवेश में रिस्क और रिवॉर्ड का संतुलन बना रहता है। अगर एक फंड बाजार के उतार-चढ़ाव में थोड़ा पिछड़ता भी है, तो दूसरा फंड आपके ओवरऑल रिटर्न की भरपाई कर सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि बहुत ज्यादा फंड्स चुन लेने से पोर्टफोलियो ओवर-क्लटर हो सकता है और रिटर्न औसत रह सकता है।

कैसे बनेगा 2 करोड़ का फंड?

₹2 करोड़ का विशाल फंड बनाने के लिए केवल एसआईपी चुनना ही काफी नहीं है, बल्कि समय और स्टेप-अप (Step-up) रणनीति का इस्तेमाल करना भी आवश्यक है। मान लीजिए कि आप 12% के संभावित रिटर्न पर ₹10,000 की मासिक एसआईपी करते हैं, तो आपको ₹2 करोड़ तक पहुंचने में लगभग 25 साल का समय लगेगा। लेकिन अगर आप हर साल अपनी एसआईपी राशि में केवल 10% की बढ़ोतरी (Step-up) करते हैं, तो यही ₹2 करोड़ का लक्ष्य आप महज 17 से 18 सालों में ही हासिल कर सकते हैं। इसलिए, चाहे आप 10 हजार की एक एसआईपी करें या 5 हजार की दो, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने वित्तीय अनुशासन को बनाए रखें और हर साल अपनी आय बढ़ने के साथ निवेश की रकम बढ़ाते रहें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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