Farmers Relief Package : तमिलनाडु सरकार ने राज्य के धान किसानों को राहत देने के लिए 134.83 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज (paddy farmers relief package) की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शुक्रवार को यह फैसला लिया। सरकार का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में देरी और कम बारिश की आशंका के कारण किसानों को खेती में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह पैकेज किसानों की मदद करेगा और खेती को प्रभावित होने से बचाएगा।
कावेरी डेल्टा के किसानों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक यह विशेष पैकेज मुख्य रूप से कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत तंजावुर, तिरुवरूर और नागपट्टिनम जिलों के किसानों को सहायता दी जाएगी। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों के किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार ने पैकेज की कुल राशि में से 77.50 करोड़ रुपये डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए और 57.33 करोड़ रुपये अन्य जिलों के किसानों के लिए निर्धारित किए हैं।
कुरुवई धान फसल की खेती को मिलेगा समर्थन
इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य किसानों को ‘कुरुवई’ धान फसल की खेती में सहायता देना है। कुरुवई एक अल्पावधि धान फसल होती है, जिसकी बुवाई जून महीने में की जाती है और सितंबर में इसकी कटाई होती है। यह फसल तमिलनाडु के कई किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। मानसून में देरी के कारण इस बार इसकी खेती प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए सरकार ने समय रहते सहायता देने का निर्णय लिया है।
अन्य धान फसलों को भी मिलेगी मदद
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पैकेज केवल कुरुवई फसल तक सीमित नहीं रहेगा। अप्रैल और मई के दौरान शुरू होने वाले कार और सोरनावरी मौसम की 120 दिन की धान फसल की खेती के लिए भी किसानों को सहायता प्रदान की जाएगी। इससे अधिक किसानों को लाभ मिलेगा और राज्य में धान उत्पादन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने में हुई देरी
तमिलनाडु में हर वर्ष 12 जून को मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। इससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र में खेती की शुरुआत होती है। लेकिन इस बार मौसम विभाग ने सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है और दक्षिण-पश्चिम मानसून भी समय पर सक्रिय नहीं हुआ है। इसी कारण सरकार अभी तक बांध से पानी नहीं छोड़ सकी है। सरकारी बयान के अनुसार, मेट्टूर बांध का जलस्तर फिलहाल 79.56 फुट है, जो सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। इसलिए जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है।
लाखों एकड़ खेती पर पड़ा असर
पानी छोड़े जाने में देरी का असर कावेरी डेल्टा क्षेत्र की खेती पर दिखाई दे रहा है। आमतौर पर इस क्षेत्र में लगभग पांच लाख एकड़ भूमि पर खेती होती है। हालांकि इस बार सिंचाई की कमी के कारण पूरी खेती प्रभावित होने की आशंका है। अधिकारियों का अनुमान है कि भूजल स्रोतों और उपलब्ध जल संसाधनों की मदद से करीब 3.55 लाख एकड़ क्षेत्र में खेती की जा सकेगी।
किसानों को बीज और उर्वरकों पर मिलेगी सहायता
विशेष पैकेज के तहत किसानों को कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें जैव उर्वरक, धान की फसल के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों वाले उर्वरक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में सहायता शामिल है। इसके अलावा खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू की जाएंगी।
खाद्य सुरक्षा मजबूत करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यह पैकेज मौजूदा मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच किसानों को आर्थिक सहारा देगा। साथ ही धान उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार लाने और राज्य की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से हजारों किसानों को राहत मिलेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
