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Agriculture Equipment Subsidy: पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए लोन देंगे राज्य सहकारी बैंक

Agriculture Equipment Subsidy: किसान अब फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदने के लिए राज्य सहकारी बैंकों से ऋण ले सकते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी खरीदने को ग्रामीण ऋण आसानी से उपलब्ध कराना है ताकि धान की पराली जलाने पर रोक लगाई जा सके।

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कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी (तस्वीर-Canva)

Agriculture Equipment Subsidy: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को कहा कि किसान अब फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदने के लिए राज्य सहकारी बैंकों से ऋण ले सकते हैं। मान ने कहा कि राज्यभर के सहकारी बैंकों ने फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना शुरू की है।

इसका क्या है उद्देश्य

उन्होंने यहां एक बयान में कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी खरीदने को ग्रामीण ऋण आसानी से उपलब्ध कराना है ताकि धान की पराली जलाने पर रोक लगाई जा सके। मान ने कहा कि यह योजना चंडीगढ़ और जिला सहकारी बैंकों की 802 शाखाओं में शुरू की गई है। उन्होंने किसानों से इस योजना का लाभ उठाने को कहा।

कृषि उपकरणों की खरीद पर 80 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठा पाएंगे

प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पीएसी) या अन्य संस्थाएं कॉमन हायरिंग सेंटर (सीएचसी) योजना के तहत कृषि उपकरणों की खरीद पर 80 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठा सकती हैं। इसी तरह, किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए बेलर और सुपरसीडर जैसे कृषि उपकरणों की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने में सहायक होगी।

भाषा इनपुट के साथ

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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