कृषि

किसानों की आमदनी में बड़ी गिरावट की आशंका, जानिए क्या हैं कारण?

Farmers Income: देश के किसानों की इस सीजन में खेती से होने वाली आय में तेज गिरावट आ गई है। एलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अनियमित बारिश और फसल नुकसान ने खरीफ फसलों की कीमतों को गिरा दिया है। इससे किसान की आमदनी कम हुई और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक हालात कमजोर हुए हैं। ग्रामीण भावना भी नकारात्मक हुई है।

Image

किसानों की लुढ़की (तस्वीर-ANI)

Photo : ANI

Farmers Income : देश के किसान इस साल खेती से होने वाली आमदनी में तेज गिरावट का सामना कर रहे हैं। एलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार अनियमित बारिश, फसल नुकसान और खरीफ फसलों की कीमतों में भारी गिरावट ने ग्रामीण आय को कमजोर कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर के ग्रामीण इलाकों में खेती से होने वाली आमदनी गिरावट के कगार पर है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक रिपोर्ट में बताया गया कि अनियमित बारिश के कारण फसलें खराब हुईं और खरीफ फसलों की कीमतें नीचे गिर गईं। इससे किसानों की आमदनी कम हो गई है और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।

प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में आमदनी में कमी

धान उगाने वाले प्रमुख राज्यों पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों की शुद्ध खेती आमदनी इस वित्तीय वर्ष (FY26) में करीब 10 प्रतिशत कम हो गई है। यह स्तर कोविड-19 के समय के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही कई राज्यों में कैश सहायता योजनाएं, मुफ्त बिजली और ग्रामीण मजदूरी में स्थिरता जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन व्यापक फसल नुकसान और फसलों की कीमतों में अभूतपूर्व गिरावट ग्रामीण मांग को बनाए रखने में चिंताएं पैदा कर रही हैं।

खरीफ सीजन में कीमतें MSP से नीचे

साल 2025 के खरीफ सीजन में, जो अक्टूबर-नवंबर में अधिकतर फसल कटाई का समय है, किसानों को फसलों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी नीचे मिलने का सामना करना पड़ा। कृषि बाजार एक्सपर्ट्स के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, अधिक मॉनसून बारिश, कटाई में देरी, बाजार में एक साथ अधिक फसल आने से आपूर्ति बढ़ जाना, फसल की गुणवत्ता में कमी और सरकारी हस्तक्षेप की सीमितता।

आयात और कस्टम ड्यूटी में बदलाव से दबाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कपास, तूर और उरद जैसी प्रमुख फसलों के लिए शुल्क मुक्त आयात और क्रूड पाम, सोया और सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने से मंडी में कीमतें और दबाव में आई हैं। इसके अलावा, अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों ने मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की कीमतों को भी प्रभावित किया है। मंडी के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 तक कई फसलों की कीमतें MSP से काफी नीचे थीं। उदाहरण के लिए, काले चने की कीमत 19 प्रतिशत, कपास 8 प्रतिशत, सोयाबीन 18 प्रतिशत और मक्का 27 प्रतिशत कम थी।

सरकारी खर्च और ग्रामीण विकास पर असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस साल केंद्रीय सरकार की ग्रामीण खर्च योजना में कमी आई है। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच, ग्रामीण विकास बजट का केवल 45 प्रतिशत खर्च हुआ, जबकि पिछले साल इस अवधि में यह 52 प्रतिशत था। कम राजस्व और बजट अनुमान से कम सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि के कारण, रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में ग्रामीण खर्च में कोई बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

किसानों की आय में गिरावट और फसलों की कीमतों में दबाव के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। इस स्थिति में ग्रामीण उपभोग और मांग कमजोर होने की आशंका है। अगर यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो न केवल किसानों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि ग्रामीण बाजार और ग्रामीण जीवन स्तर पर भी असर पड़ेगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सरकार को कृषि समर्थन और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे, ताकि किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें और ग्रामीण मांग बनी रहे।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article