Monsoon Impact : देश में मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद अब बारिश की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। जुलाई में अब तक सामान्य से 42 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे पूरे देश में मानसून की कमी काफी हद तक कम हो गई है। जून के अंत में जहां बारिश की कमी 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह घटकर करीब 15.2 प्रतिशत रह गई है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को बताया कि अच्छी बारिश के कारण कम बारिश वाले जिलों की संख्या भी घटकर 178 रह गई है, जबकि जून के अंत में ऐसे जिलों की संख्या 262 थी।
मध्य भारत में मानसून की वापसी से किसानों को बड़ी राहत
पिछले एक सप्ताह से मानसून के सक्रिय होने के कारण मध्य भारत के वर्षा आधारित इलाकों में बारिश की स्थिति बेहतर हुई है। इस क्षेत्र में अब सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जबकि जून के अंत में यहां 50 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई थी। कृषि मंत्री ने कहा कि देश के कई हिस्सों में हाल के दिनों में अच्छी बारिश हुई है, जिससे बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में सुधार आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जुलाई में मानसून और मजबूत होगा, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आएगी। अच्छी बारिश से धान, दालें, तिलहन और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों को फायदा मिलने की संभावना है।
खरीफ बुवाई में आई थी गिरावट
इस साल मानसून की देरी के कारण खरीफ फसलों (Kharif Crops) की बुवाई प्रभावित हुई थी। पिछले सप्ताह तक देश में करीब 3.50 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत कम थी। मध्य भारत देश की प्रमुख खरीफ फसलों जैसे धान, दाल और तिलहन के कुल क्षेत्रफल का करीब एक तिहाई हिस्सा है। बारिश में सुधार के बाद अब किसानों को समय पर बुवाई पूरी करने की उम्मीद है। इससे उत्पादन बढ़ने और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने की संभावना है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में अभी भी चिंता
हालांकि देश के कई हिस्सों में मानसून की स्थिति सुधरी है, लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अभी भी बारिश की भारी कमी बनी हुई है। इस क्षेत्र में अब तक सामान्य से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसका असर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों की खेती पर पड़ सकता है। बिहार में बारिश की कमी करीब 53 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत और झारखंड में भी करीब 40 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम भारत में 15 प्रतिशत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 14 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
कम पानी वाली फसलों की सलाह
कृषि एक्सपर्ट्स ने किसानों को सलाह दी है कि जहां पानी की कमी है, वहां कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दी जाए। किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों की खेती बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। कृषि मंत्रालय ने देश के 111 जिलों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना है, जहां सिंचाई की सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है। इनमें महाराष्ट्र के 20 जिले शामिल हैं, जबकि बाकी जिले उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, ओडिशा, झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में हैं।
किसानों के लिए तैयार की गई आकस्मिक योजना
कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने प्रभावित जिलों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं में वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना, कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की खेती, फसल विविधीकरण और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा फसल नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए सरकार किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।
अगले दिनों में और आगे बढ़ेगा मानसून
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और अरब सागर के बाकी हिस्सों तक पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। मानसून देश की वार्षिक बारिश का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है, इसलिए इसकी गति कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मानसून की स्थिति को देखते हुए मंगलवार को कई मंत्रालयों के साथ बैठक की। सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर रणनीति तैयार करें, ताकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में कृषि और आर्थिक गतिविधियों पर ज्यादा असर न पड़े।
