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प्राइस सपोर्ट स्कीम क्या है? जिसके तहत सरकार ने चना, सरसों और मसूर की खरीद को दी मंजूरी

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  • Updated Feb 25, 2026, 12:51 PM IST

MSP News: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने रबी मार्केटिंग सत्र 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत चना, सरसों और मसूर की खरीद की मंजूरी दे दी है। उन्होंने राज्यों से 31 मार्च से पहले केंद्रीय कृषि योजनाओं की धनराशि का पूरा और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।

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सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत चना, सरसों, मसूर की खरीद को मंजूरी दी (तस्वीर-istock)

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MSP News : केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (24 फरवरी 2025) को कहा कि सरकार ने रबी मार्केटिंग सत्र 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत चना, सरसों और मसूर की खरीद को मंजूरी दे दी है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे 31 मार्च से पहले प्रमुख कृषि योजनाओं के तहत उपलब्ध केंद्रीय धनराशि का पूरा और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करें। मंत्री चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और अन्य कृषि उन्नति योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। चौहान ने कहा कि वित्त वर्ष अब खत्म होने के करीब है। ऐसे में यह जरूरी है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उपलब्ध कराई गई धनराशि का समय पर, सही तरीके से और किसानों के सर्वोत्तम हित में उपयोग हो।

रबी 2026 के लिए राज्यों को दी गई खरीद की मंजूरी

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत राज्यों को चने और सरसों की खरीद की स्वीकृति की जानकारी दी।

चने की खरीद:-

  • महाराष्ट्र: 7.61 लाख टन
  • मध्य प्रदेश: 5.8 लाख टन
  • राजस्थान: 5.53 लाख टन
  • गुजरात: 4.13 लाख टन

सरसों की खरीद:-

  • राजस्थान: 13.78 लाख टन
  • मध्य प्रदेश: 6.01 लाख टन
  • गुजरात: 1.33 लाख टन

मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) क्या है?

मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) तब लागू की जाती है जब अधिसूचित दालों, तिलहनों और खोपरा की बाजार कीमतें प्रमुख कटाई सत्र के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चली जाती हैं। इसका उद्देश्य किसानों को फसल की न्यूनतम कीमत सुनिश्चित करना है।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की घोषणा

बैठक में चौहान ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत अरहर, उड़द और मसूर की खरीद 2030-31 तक पूर्व-पंजीकृत किसानों से केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से करने की भी घोषणा की। इससे किसानों को लंबी अवधि में उनकी फसलों के लिए सुनिश्चित बाजार मिलेगा और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

राज्यों की भागीदारी

इस ऑनलाइन बैठक में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, हरियाणा, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने अपने-अपने राज्यों में कृषि योजनाओं की प्रगति और फसल की खरीद की तैयारियों के बारे में जानकारी साझा की।

केंद्रीय धनराशि का समय पर उपयोग जरूरी

मंत्री चौहान ने राज्यों से विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोग सही समय पर और सही दिशा में हो। उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसानों के हित में काम होगा, बल्कि कृषि क्षेत्र की समग्र विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी।

MSP और किसान सुरक्षा

मूल्य समर्थन योजना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। जब बाजार कीमतें MSP से नीचे जाती हैं, तब यह योजना लागू होती है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है और वे अपनी फसल का सही मूल्य पा सकते हैं।

आगे की तैयारी

चौहान ने राज्यों को निर्देश दिए कि वे रबी 2026 के लिए खरीद केंद्रों की तैयारी, स्टॉक प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दें। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि डिजिटल और ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाकर किसानों की फसल को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है।

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