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Gehu Ki Kheti : गेहूं की होगी बंपर पैदावार, इन तरीकों को अपनाया तो कम लगेगा पानी-खाद; किसान हो जाएंगे मालामाल

Gehun Ki Bampar Paidawar Kaise Karen (गेहूं की अच्छी पैदावर कैसे करें) : उत्तर भारत में रबी की फसल की बुआई का सही समय शुरू हो गया है। 25 नवंबर तक अगेती किस्म के गेहूं की खेती करने वाले किसान बुआई शुरू कर सकते हैं। लेकिन, खेती पर बीज डालने से पहले अन्नदाताओं को कुछ बातों का खास ख्याल रखना होगा, जिससे पैदावार पर अच्छा असर दिखाई देगा। यानी कितनी बार खेत की जुताई करें और पलेवा के बाद खाद की मात्रा और किस किस्म के अधिक पैदावार वाले बीजों का इस्तेमाल करें? अगर आधुनिक खेती के लिए के अलावा अहम बातों का ध्यान रखें तो बंपर पैदावार किसानों को मालामाल बना सकती है।

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गेहूं की खेती आसान तरीके से कैसे करें

KEY HIGHLIGHTS
  • गेहूं की खेती करने का सबसे आसान तरीका क्या है?
  • कम लागत में कैसे करें ज्यादा गेहूं की पैदावार
  • गेहूं की खेती में खाद और पानी लगाने का सही समय

Gehu ki Kheti Ke Tips : उत्तर भारत में रबी की फसलों की बुआई चल रही है। मैदानी इलाकों पंजाब से लेकर यूपी और बिहार के किसान रबी सीजन में गेहूं की फसल बहुतायत मात्रा में करते हैं। अगर खेती-बाड़ी के इतिहास पर नजर डालें तो अभी तक पारंपरिक खेती पर निर्भरता अधिक है, लेकिन धीरे-धीरे कम हो रही जोत योग्य खेती के बाद हमें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तौर तरीकों को अपनाना होगा, जिससे न सिर्फ लागत कम लगेगी, बल्कि पैदावार भी अधिक होगी। तो आइये आज हम गेहूं की खेती से जुड़े कुछ मॉर्डन टेक्नोलॉजी पर बात करेंगे, जिसको अपना कर अन्नदाता बंपर पैदावार कर सकते हैं।

गेहूं की खेती के लिए कितनी बार जुताई करें?

खरीफ की फसल कटने के बाद खाली हुए खेत नवंबर महीने तक रबी की फसल के लिए तैयार होने लगते हैं। वैसे गेहूं की खेती करने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ तरीके उत्पादन बढ़ाने में कारगर साबित हो सकते हैं। सर्वप्रथम गेहूं की बुआई के लिए खेत को जुताई कर समतल बनाएं। लागत अधिक होने की वजह से किसान कई बार एक ही बार जुताई करते हैं, लेकिन कम से कम दो बार की जुताई बेहतर होगी। पहली बार की जोत मिट्टी को पलटने वाले हल से करें, (जो आजकल रोटावेटर) के रूप में मौजूद हैं, ताकि पुरानी फसल के अवशेष नष्ट हो जाएं। घास या अन्य अवशेष खत्म होने के बाद दूसरी बार समतल बनाने के लिए जुताई करना उचित होगा।

गेहूं की खेती की जुताई

गेहूं की खेती की जुताई

गेहूं बोने से पहले क्या करें

समतल खेती को पलेवा (यानी पानी लगाएं) करें। इसके बाद दो या तीन दिन बाद देखें की खेत में कितनी नमी है? क्या खेत बीज बोने की स्थिति में है या और ड्राई करने की जरूत है? बुआई से पहले खाद की मात्रा का खासा ख्याल रखें, हो सके तो जब खेत खाली होते हैं तब गोबर या जैविक खाद का उपयोग करें, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जो यकीनन अच्छी पैदावार के लिए मुफीद साबित होगी। कृषि पद्धति के अनुरूप ही पलेवा के बाद बीज बोने से पहले खाद डालें। बुआई के लिए सीड ड्रिल मशीन का उपयोग करें, जिसमें बीज की बुआई लगभग 4-5 सेमी. और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20-25 सेमी रहे। माना जाता है कि बुआई के बाद फसल की अच्छी पैदावार के लिए नियमित निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है।

कब करें गेहूं की बुआई

कृषि एक्पर्ट बताते हैं कि अगेती फसल की बुआई का सामान्य बुआई 15 अक्टूबर से शुरू कर सकते हैं। अगेती खेती 25 नवंबर से, मध्यात प्रजातियों की बुआई 6 से 20 दिसंबर तक बेहतर रहेगी। हालांकि, अगर पारंपरिक बीजों से अलग फसल और पैदावार लेना चाहते हैं तो नई किस्म के बीजों को तरजीह देनी होगी। हालांकि, इसकी कीमत अधिक हो सकती है। गेहूं की कुछ अच्छी किस्म में डीडब्ल्यूबी 187, डब्ल्यूआर 544, के 307, एचडी 2967, पीबीडब्ल्यू 343, एचडी 3086, एचडी 3226 हैं, जिन्हें पहले स्टेज पर बोना चाहिए। वहीं, विलंब से बुआई करने के लिए एचआइ 1563, एचडी 2985, पीबीडब्ल्यू 373, डीबीडब्ल्यू 173, एचडी 3118, डीबीडब्ल्यू 16, नरेंद्र गेहूं 1014, पीबीडब्लू 752,पीबीडब्लू 757 प्रजाति के बीच अच्छी पैदावार दे सकते हैं। उधर, सबसे आखिर में यानी 21 दिसंबर से 10 जनवरी तक अगर बुआई करना चाहते हैं तो पीबीडब्ल्यू 14 और एचडब्ल्यू 2025 किस्म के गेहूं बो सकते हैं। इन प्रजातियों के बीच कम लागत में अच्छी पैदावार दे सकते हैं।

गेहूं की बुआई

गेहूं की बुआई

गेहूं बुआई से पहले कौन सी खाद डालें

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि बुआई के समय खेत पर उसके एरिया के हिसाब से डीएपी या एनपीके इत्यादि के साथ जिंक सल्फेट और ह्यूमिक एसिड डालना चाहिए। प्रति एकड़ के हिसाब से 50 या 55 किलो डीएपी खाद उपयुक्त है। सबसे अच्छा होगा कि डीएपी को मिट्टी में मिला लें, ताकि जड़ों की गहराई तक फॉस्फोरस तुरंत मिल सके। हालांकि, यह मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की किस्म पर निर्भर करती है। डीएपी को बुआई इसके बाद पहली सिंचाई पर और बाद में यूरिया की शेष मात्रा दी जानी चाहिए, जिससे गेहूं के कल्ले निकलने में मदद मिलती है। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि यूरिया का इस्तेमाल एक फसल पर 3 बार अधिक है। पहली बार बुआई के 21 से 25 दिन बाद (सिंचाई के समय), दूसरी सिंचाई के बाद 40 से 45 दिन बाद और तीसरी बार दाना पड़ने के समय 70 से 75 दिन पर डाला जा सकता है।

गेहूं में खाद डालता किसान

गेहूं में खाद डालता किसान

गेहूं की फसल पर पहला पानी कब लगाएं

गेहूं की खेती के लिए सिंचाई का समय बेहद संतुलित रखना होगा। ये प्रत्येक अलग किस्म की वैरायटी के लिए भिन्न-भिन्न समय हो सकता है। आमतौर पर 20 से 25 दिन बाद पहली सिंचाई उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन यह मिट्टी के प्रकार पर भी निर्भर करता है। इसके फसल की अवस्था जैसे कल्ले निकलने यानी 40 से 45 दिन बाद दूसरा पानी, गांठ बनने पर 60 से 70 दिन बाद तीसरी और दाना पडने पर चौथा या आखिरी पानी पांचवा भी हो सकता है, ये भौगोलिक परिस्थिति और मौसम पर भी डिपेंड करता है।

गेहूं की खेती की जानकारीखेती से जुड़े विवरण
गेहूं बोने का सही समय15-30 नवंबर
गेहूं बुआई का आदर्श तापमान22 डिग्री सेल्सियस सामान्य या कम
गेहूं की खेती कितने दिन में तैयार होगी110 से 130 या 140 दिन (किस्म पर निर्भर)
गेहूं की खेती4 से 5 बार
गेहूं की खेती में कितनी खाद डालें 50 से 55 किलो (प्रति एकड़)
गेहूं बोने आखिरी समयजनवरी में कुछ किस्में बोई जा सकती हैं

गेहूं की बुआई से पहले कौन सी दवा छिड़कें

गेहूं की बुआई से पहले खर पतवार को खत्म करना बेहद जरूरी है। इसके बाद 40 किलोग्राम गेहूं बोने के लिए 100 ग्राम कैप्टास या बावस्टीन या कोई अन्य असरदार दवा के छिड़काव की जरूरत है। पहले गेहूं को बीज को छायादार या छत के नीचे फर्श पर बिछाएं फिर बीज पर पानी का छिड़काव करें और ऊपर से रसायन को ऊपर से बिखेर दें। इसके बाद अच्छी तरह से हाथ पूरे बीज को मिला दें फिर गेहूं की फसल की बुआई करना बेहतर रहेगा। अगर, पोटाश की बात करें तो मिट्टी की क्वालिटी पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर प्रति बीघा 10 किलोग्राम पोटास डाला जा सकता है। लेकिन सटीक मात्रा के लिए मिट्टी की जांच कराना सबसे बेहतर है। वैसे तो उत्तर भारत के राज्यों में यूपी में सबसे अधिक गेहूं का उत्पादन होता है, लेकिन हरियाणा और पंजाब के किसान भी पीछे नहीं हैं। लिहाजा, यहां के किसानों को एक्सपर्ट की सलाह लेनी आवश्यक है।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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