अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है जो उसे ड्रोन क्षमताओं में सबसे आगे बनाती है। अमेरिका के पास 13000 से ज़्यादा मानवरहित हवाई वाहन हैं, जिससे अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री ड्रोन फ्लीट वाला देश बन गया है। अमेरिकी मिलिट्री ड्रोन फ्लीट का 60% से ज्यादा हिस्सा AeroVironment RQ-11 Ravens का है, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से हवाई निगरानी और टारगेट हासिल करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका का MQ-9 Reaper ड्रोन आधुनिक युद्ध तकनीक का सबसे घातक उदाहरण है। इसे 'डेथ फ्रॉम एबव' यानी आसमान से मौत कहा जाता है।
पावर एटलस के अनुसार, तुर्की के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मिलिट्री ड्रोन फ्लीट है। तुर्की के पास कुल 1,421 मिलिट्री ड्रोन हैं। तुर्की ड्रोन टेक्नोलॉजी में अग्रणी देशों में से एक है, यह मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस UAV Bayraktar TB2 का गढ़ है, जो सबसे प्रभावी मिलिट्री ड्रोनों में से एक है। न सिर्फ तुर्की Bayraktar TB2 का इस्तेमाल करता है, बल्कि अजरबैजान, कतर और यूक्रेन जैसे देश भी इसका इस्तेमाल करते हैं। तुर्की अपने करीबी पाकिस्तान को भी ड्रोन सप्लाई करता है।
दुनिया में सबसे ज़्यादा मिलिट्री ड्रोन वाले देशों की सूची में पोलैंड तीसरे स्थान पर है, जिसके पास WB ग्रुप द्वारा विकसित एक हजार से ज्यादा वॉरमेट लोइटरिंग म्यूनिशन UAVs का फ्लीट है। पोलैंड के पास कुल 1,209 ड्रोन हैं। ये हल्के ड्रोन हैं जिनका इस्तेमाल पोलिश सशस्त्र बल विभिन्न सुरक्षा मिशनों के लिए करते हैं। इसके अलावा, पोलैंड के पास अपनी इन्वेंट्री में 40 Orlik PGZ-19R और 45 Orbiter मानवरहित हवाई वाहन हैं।
रूस के पास करीब 1050 मिलिट्री ड्रोन हैं। घरेलू स्तर पर बनाए गए ड्रोन फ्लीट में से एक ओरलान-10 का इस्तेमाल मुख्य रूप से जासूसी मिशन के लिए किया जाता है। रूस के पास 2013 में इजराइल से खरीदे गए 30 से अधिक सर्चियर Mk II ड्रोन हैं। यूक्रेन के साथ संघर्ष के जवाब में रूस अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और संघर्ष के क्षेत्र में अमेरिका के साथ मुकाबला करने के लिए लंबी दूरी के अटैक ड्रोन के विकास में तेजी ला रहा है।
र्मनी यूरोप के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है, जिसके पास 670 मिलिट्री ड्रोन का बेड़ा है, जिनका इस्तेमाल निगरानी, जासूसी, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने सहित कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
भारत लगभग 625 मिलिट्री ड्रोन के साथ छठे स्थान पर है, जिसमें 2019 में पेश किए गए 600 स्पाइलाइट मॉडल शामिल हैं। भारत ने इजराइल से 10 हेरॉन 1 ड्रोन भी खरीदे हैं। सभी मौजूदा ड्रोन इजराइली मूल के हैं, जो वैश्विक स्तर पर मिलिट्री UAVs के प्रमुख ऑपरेटरों में से एक के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत करता है। भारत, अमेरिका से 12 MQ-9 रीपर ड्रोन खरीद पर भी बात कर रहा है। पाकिस्तान-चीन से मौजूदा खतरे को भांपते हुए भारत ने अपनी ड्रोन बटालियन भी बनाई है।
फ्रांस के पास लगभग 591 मिलिट्री ड्रोन का बेड़ा है, जो फ्रांस को दुनिया में सबसे ज्यादा मिलिट्री ड्रोन वाले देशों की सूची में रखता है। इसमें थेल्स के Spy’Ranger UAVs, Sagem के 11 Safran Patroller ड्रोन और अमेरिका से खरीदे गए 12 MQ-9 रीपर शामिल हैं। देश का Système de Drones Aérien de la Marine (SDAM) कार्यक्रम भी फ्रांसीसी नौसेना के फ्रिगेट पर इस्तेमाल के लिए मानवरहित रोटरक्राफ्ट के विकास पर काम कर रहा है।
पावर एटलस और द ड्रोन डेटाबुक के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सेना के पास कुल लगभग 557 ड्रोन हैं। इसमें PD-100 ब्लैक हॉर्नेट 350 फैंटम ड्रोन शामिल हैं जो निगरानी जैसे सामरिक सैन्य उद्देश्यों के लिए हथियारबंद हैं। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स जनरल एटॉमिक्स के 12 से 16 MQ-9 रीपर UAVs ऑपरेट करती है, जबकि नौसेना छह MQ-4C ट्राइटन ड्रोन का इस्तेमाल करती है।